![]() |
| गढ़ थाना परिसर का बरगद का पेड़ बना कौतूहल का केंद्र Aajtak24 News |
रीवा - गढ़ थाना परिसर स्थित बरगद का विशाल वृक्ष इन दिनों नगरवासियों की जिज्ञासा और चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर बरगद के वृक्षों में पत्तियां फरवरी-मार्च माह में झड़ती हैं, किंतु थाना परिसर का यह वृक्ष सितंबर माह में ही पतझड़ होकर पुनः नई कोपलों से भरने लगा है। इस असामान्य घटना को देखने लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं और इसे लेकर तरह-तरह की व्याख्याएं की जा रही हैं।
वैज्ञानिक पहलू
वनस्पति शास्त्र के जानकारों के अनुसार, बरगद का वृक्ष उत्तरी गोलार्ध में प्रायः फरवरी-मार्च के बीच पतझड़ से गुजरता है। वहीं दक्षिणी गोलार्ध (ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील जैसे देशों) में यह प्रक्रिया सितंबर-अक्टूबर-नवंबर में देखी जाती है। गढ़ थाना परिसर के वृक्ष का सितंबर में पतझड़ होना वैज्ञानिक दृष्टि से असामान्य है और स्थानीय स्तर पर इसका सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है।
धार्मिक और लोकमत
दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने इस घटना को धार्मिक और भावनात्मक दृष्टि से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि यह बरगद का वृक्ष पूर्व में पुलिस विभाग से जुड़े अंजनी तिवारी द्वारा लगाया गया था। कुछ लोगों का मानना है कि “जिस प्रकार सेवा से जुड़े लोग कठिनाइयों से गुजर रहे हैं, उसी प्रकार यह वृक्ष भी मानो दुखी होकर पतझड़ का सामना कर रहा है।” वहीं, कुछ श्रद्धालु इसे आने वाले समय का संकेत और देवी-देवताओं की शक्ति का संदेश मानते हैं।
आसपास के पेड़ यथावत
दिलचस्प बात यह है कि थाना परिसर और उसके आसपास के सभी वृक्ष सामान्य अवस्था में हैं और उनमें पत्तियां यथावत लगी हुई हैं। केवल यही बरगद का पेड़ असमय पतझड़ का शिकार हुआ है, जिसने इसे और भी रहस्यमय बना दिया है।
चर्चा का विषय
नगरवासियों से लेकर विद्वानों और धार्मिक संतों तक में यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है। कोई इसे प्राकृतिक असामान्यता मान रहा है तो कोई इसे आस्था से जोड़ रहा है। वैज्ञानिक, धार्मिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से यह घटना अध्ययन का विषय भी बन गई है।
