प्रशासनिक अनदेखी से रीवा-चाकघाट मार्ग पर भीषण हादसा: डिवाइडर कट बने 'मौत के द्वार', एक युवक की दर्दनाक मौत Aajtak24 News

प्रशासनिक अनदेखी से रीवा-चाकघाट मार्ग पर भीषण हादसा: डिवाइडर कट बने 'मौत के द्वार', एक युवक की दर्दनाक मौत Aajtak24 News

रीवा - रीवा–चाकघाट मार्ग पर प्रशासनिक लापरवाही के कारण सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिले की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक इस मार्ग पर बने अव्यवस्थित डिवाइडर कट अब 'मौत के द्वार' साबित हो रहे हैं। सोमवार, 29 सितम्बर 2025 की शाम लगभग 5 बजे गढ़ थाना क्षेत्र के धारा विवाह स्थल के समीप हुए एक भीषण हादसे में एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है।

मजदूरी से लौटते युवकों को ली अव्यवस्था ने ली जान

जानकारी के अनुसार, मृतक राजेश (उम्र लगभग 35 वर्ष) अपने एक साथी के साथ प्रयागराज से मजदूरी कर अपने गृह ग्राम लौट रहा था। वे मोटरसाइकिल क्रमांक एमपी 17 स ह 0815 से यात्रा कर रहे थे। धारा विवाह स्थल के समीप एक अवैध रूप से खुले डिवाइडर कट के कारण उनकी तेज रफ्तार बाइक सामने से आ रहे ऑटो क्रमांक एमपी 17 आर ए 0504 से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक सवार सड़क पर बुरी तरह से जख्मी होकर गिर पड़े।

हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस की डायल-112 और 108 एंबुलेंस तत्काल मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुरूदेव ले जाया गया, जहाँ उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें संजय गांधी मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर कर दिया गया। देर रात लगभग 12 बजे, घायल राजेश ने दम तोड़ दिया। उसके साथी की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

कागजों तक सीमित कलेक्टर के आदेश, ढाबा संचालक चला रहे सड़क

स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने इस हादसे के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग को जिम्मेदार ठहराया है। उनका स्पष्ट आरोप है कि रीवा से चाकघाट तक की पूरी सड़क पर दर्जनों डिवाइडर कट हैं, जिनमें से कई कट सड़क सुरक्षा मानदंडों की धज्जियां उड़ाते हुए बनाए गए हैं।

सबसे बड़ा आरोप यह है कि इनमें से कई कट स्थानीय ढाबा संचालकों की सहमति और कथित पैसों के लेन-देन से खोले और बंद किए जाते हैं। गौरतलब है कि जिला कलेक्टर द्वारा पूर्व में ही ऐसे अवैध और खतरनाक डिवाइडर कटों को बंद करने के स्पष्ट आदेश दिए गए थे, लेकिन इन आदेशों का पालन केवल सरकारी फाइलों और कागजी कोरम तक ही सीमित रहा। जमीनी स्तर पर कोई ठोस अमल न होने का खामियाजा आज राहगीरों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि प्रशासनिक अधिकारी केवल आदेश जारी करने तक ही अपनी जिम्मेदारी समझते हैं, जबकि जमीनी क्रियान्विति न होने से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। प्रशासन की यह उदासीनता और जवाबदेही की कमी नागरिकों के जीवन को खतरे में डाल रही है।


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