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| रीवा में चंदन बाग खतरे में, प्रशासन-वन विभाग की मिलीभगत से कट रहे हजारों पेड़ Aajtak24 News |
रीवा - जिला प्रशासन और वन विभाग की कथित मिलीभगत के कारण रीवा जिले की एक महत्वपूर्ण धरोहर, गढ़ तहसील के ग्राम पंचायत में स्थित चंदन बाग, नष्ट होने की कगार पर है। एक समय 8 एकड़ में फैले इस बाग में हजारों चंदन, सागौन और अन्य पेड़ थे, लेकिन अब अतिक्रमण और अवैध कटाई के कारण इसका अस्तित्व खतरे में है। आरोप है कि यह बाग कभी भी वन विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सका, जिसके कारण राजस्व विभाग की जमीन होने का हवाला देकर यहां के चंदन के पेड़ काट दिए गए। इस संबंध में वन विभाग की धारा के तहत कोई मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ।
हाल ही में, ग्राम पंचायत गढ़ के सरपंच और अन्य अधिकारियों पर मंदिर के विकास और रोड निर्माण के नाम पर हरे पेड़ों को जेसीबी मशीन से उखाड़ने का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सरपंच के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और उन्हें इस बाग को वन विभाग में दर्ज कराना चाहिए था। स्थानीय लोगों ने कई बार रेंजर और डीएफओ को इस बारे में सूचित किया, लेकिन डीएफओ का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह भूमि "मध्य प्रदेश शासन" के नाम पर दर्ज है, इसलिए वे इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
अब यह मामला धार्मिक रूप भी ले रहा है, क्योंकि मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने भी इस बाग में मजार बनाकर अतिक्रमण किया है और पेड़ काटे हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि यह विवाद भविष्य में धार्मिक उन्माद का रूप ले सकता है। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। फिलहाल, यह सवाल खड़ा है कि क्या यह बाग अतिक्रमण, अवैध कटाई और धार्मिक विवाद से बच पाएगा या विकास के नाम पर पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

