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| रीवा में पुलिस पर 'फिल्मी' अंदाज़ में हमला, कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल; मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से जवाब मांग रही है जनता Aajtak24 News |
रीवा/मध्य प्रदेश - मध्य प्रदेश के रीवा शहर में 27 अगस्त, 2025 की शाम लगभग 6 बजे एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। एक ड्यूटी पर तैनात पुलिस आरक्षक पर दो युवकों ने न सिर्फ मारपीट की, बल्कि उसे अपनी कार के बोनट पर पटककर तेज रफ्तार में गाड़ी दौड़ा दी। यह घटना, जो किसी फिल्मी सीन जैसी लग रही थी, ने लोगों में दहशत फैला दी है और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात
यह खौफनाक वारदात शहर के व्यस्त शिल्पी प्लाजा के पास हुई। सूत्रों के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे एक पुलिस आरक्षक पर अचानक दो युवकों ने हमला कर दिया। हमलावरों ने पहले आरक्षक को बुरी तरह पीटा और फिर उसे कार के बोनट पर पटक दिया। इसके बाद वे उसी हालत में तेज रफ्तार से गाड़ी भगाने लगे। राहगीरों की आंखों के सामने यह नजारा देख लोग सकते में आ गए और मौके पर भगदड़ मच गई।घटना की सूचना मिलते ही पुलिस की अन्य टीमें तुरंत हरकत में आईं और घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल, आरोपियों से पूछताछ जारी है। इस घटना से पूरे शहर में भय और आक्रोश का माहौल है, क्योंकि अगर वर्दीधारी जवान ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?
कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल
यह घटना केवल एक पुलिसकर्मी पर हमला नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और गृहमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। जनता सवाल कर रही है:
जब पुलिस ही सरेआम हमलावरों का निशाना बन रही है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा किसके भरोसे है?
गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी होने के बावजूद अपराधी इतने बेखौफ क्यों हैं? क्या प्रदेश में कानून का कोई डर नहीं रह गया है?
सरकार हर घटना के बाद आश्वासन देती है, लेकिन न अपराध कम हो रहे हैं और न ही अपराधियों के हौसले पस्त हो रहे हैं। क्या पुलिस पर राजनीतिक दबाव है?
जनता की पुकार
यह घटना सिर्फ रीवा जिले का मामला नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। जनता अब मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से सीधा जवाब मांग रही है कि उनकी सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब पुलिस ही सुरक्षित नहीं तो उन्हें कैसे सुरक्षित महसूस होगा?
