रीवा में लक्ष्मण बाग भूमि विवाद गहराया: कैबिनेट की मंजूरी बिना शुरू हुआ निर्माण, एडवोकेट ने शासन को दी शिकायत Aajtak24 News

रीवा में लक्ष्मण बाग भूमि विवाद गहराया: कैबिनेट की मंजूरी बिना शुरू हुआ निर्माण, एडवोकेट ने शासन को दी शिकायत Aajtak24 News

रीवा/मध्य प्रदेश - रीवा के धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर लक्ष्मण बाग संस्थान की भूमि को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। बगैर किसी आधिकारिक मंजूरी के परिसर में निर्माण कार्य शुरू होने से स्थानीय लोगों और धार्मिक संगठनों में गहरा आक्रोश है। एडवोकेट बी.के. माला ने इस मामले में सीधे शासन और संभागायुक्त को लिखित शिकायत भेजकर इस अवैधानिक कार्य पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है।

निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी

शिकायत में कहा गया है कि लक्ष्मण बाग की भूमि अभी भी सरकारी रिकॉर्ड में ट्रस्ट के नाम पर दर्ज है। नियमानुसार, इस भूमि को किसी अन्य विभाग, जैसे कि संस्कृत संस्थान, को हस्तांतरित करने के लिए प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक है, जो अब तक नहीं ली गई है। न ही जमीन बदलानामा (लैंड एक्सचेंज) की कोई प्रक्रिया पूरी की गई है। इसके बावजूद, नियमों और स्थापित परंपराओं की अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। एडवोकेट बी.के. माला ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा है कि जब तक लक्ष्मण बाग संस्थान को इसके बदले बाजार मूल्य की समतुल्य भूमि उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक किसी भी तरह का निर्माण रोकना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रस्ट की नियमावली और संविधान राष्ट्रपति से अनुमोदित है, इसलिए भूमि हस्तांतरण से पहले उनका अवलोकन और अनुपालन अनिवार्य है। उन्होंने इसे एक नियम विरुद्ध और अवैधानिक कार्यवाही बताया।

धार्मिक महत्व और अयोध्या की तर्ज पर विकास की मांग

लक्ष्मण बाग को केवल एक संपत्ति नहीं बल्कि आस्था का केंद्र बताते हुए शिकायत में इसके धार्मिक महत्व पर जोर दिया गया है। यह तपोभूमि भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण जी से जुड़ी हुई है, और परिसर में चारों धाम से जुड़े देवी-देवताओं के मंदिर भी हैं। इन मंदिरों में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। स्थानीय लोग और धार्मिक संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि इस स्थान को अयोध्या की तर्ज पर एक धार्मिक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए, ताकि यह एक राष्ट्रीय स्तर का तीर्थ स्थल और पर्यटन केंद्र बन सके। लोगों का कहना है कि इस भूमि से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले जनभावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए। इस घटना ने रीवा में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और यह देखना बाकी है कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।


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