रियासी में एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत
सबसे दर्दनाक घटना रियासी जिले के महोर क्षेत्र में हुई, जहां शनिवार तड़के बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन ने एक घर को पूरी तरह से तबाह कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस हादसे में घर के मालिक नज़ीर अहमद, उनकी पत्नी और पांच नाबालिग बेटों सहित परिवार के सातों सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना इतनी भीषण थी कि बचाव दल को मलबे से शवों को निकालने में तीन से चार घंटे लग गए। महोर के एसडीपीओ वकार यूनुस ने बताया कि यह हादसा तड़के करीब 3 बजे हुआ, जब भारी बारिश और मलबे के बहाव के कारण घर धराशायी हो गया।
रामबन में 3 की मौत, 2 लापता
इसी तरह की एक और घटना रामबन जिले के राजगढ़ गांव में हुई, जहां शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात बादल फटने से अचानक बाढ़ आ गई। इस बाढ़ में तीन लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। दो अन्य लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस घटना में कई घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन घटनाओं पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट कर प्रशासन को तत्काल बचाव एवं राहत अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
रेल और सड़क यातायात बुरी तरह प्रभावित
भारी बारिश ने पूरे जम्मू संभाग में रेल और सड़क यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तर रेलवे ने 30 अगस्त को जम्मू, कटरा और उधमपुर से आने-जाने वाली 46 ट्रेनों को रद्द करने की घोषणा की। पिछले चार दिनों से रेल यातायात स्थगित है, क्योंकि कई स्थानों पर रेल लाइनें टूट गई हैं। इसी तरह, जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे प्रमुख मार्ग भी क्षतिग्रस्त होने से सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
ऑरेंज अलर्ट जारी, स्कूल बंद
राज्य में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए रामबन, जम्मू, पुंछ, किश्तवाड़ और उधमपुर के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों ने जम्मू संभाग के स्कूलों को 30 अगस्त तक बंद रखने का आदेश दिया है, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह प्राकृतिक आपदा ऐसे समय में आई है, जब पिछले कुछ दिनों से बाढ़ और भूस्खलन ने पूरे क्षेत्र में कम से कम 36 लोगों की जान ले ली है। उत्तराखंड और हिमाचल में भी बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से भारी नुकसान दर्ज किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि पूरे हिमालयी क्षेत्र में मौसम की स्थिति गंभीर बनी हुई है।