लव जिहाद फंडिंग का आरोपी अनवर डकैत नेपाल से लौटकर कोर्ट में सरेंडर, इंटरनेशनल सिम से करता था निगरानी Aajtak24 News

लव जिहाद फंडिंग का आरोपी अनवर डकैत नेपाल से लौटकर कोर्ट में सरेंडर, इंटरनेशनल सिम से करता था निगरानी Aajtak24 News

इंदौर -मध्य प्रदेश में लव जिहाद के आरोपियों को फंडिंग करने के मामले में फरार चल रहे कांग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत ने आखिरकार 75 दिनों की फरारी के बाद खुद ही इंदौर की जिला एवं सत्र न्यायालय में सरेंडर कर दिया। पुलिस उसे गिरफ्तार करने में लगातार नाकाम साबित हो रही थी। जून माह में बाणगंगा पुलिस द्वारा गंभीर धाराओं में दो केस दर्ज होने के बाद से ही कादरी फरार था। उसकी गिरफ्तारी पर ₹40,000 का इनाम भी घोषित था, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस उस तक नहीं पहुँच पा रही थी।

फरारी में नेपाल तक का सफर, पत्नी के कंगन बेचे

पुलिस और अधिकारियों से छिपने के लिए अनवर ने फरारी के दौरान कई हथकंडे अपनाए। इस दौरान उसे पैसों की भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। अपनी फरारी को जारी रखने के लिए उसे अपनी दूसरी पत्नी फरहाना के सोने के कंगन तक बेचने पड़े। इन्हीं पैसों से वह गोरखपुर होते हुए नेपाल भाग गया था। नेपाल में रहते हुए उसने पुलिस और कानून से एक कदम आगे रहने की कोशिश की। उसने एक इंटरनेशनल सिमकार्ड खरीदा, जिसका इस्तेमाल वह इंटरनेट कॉलिंग के लिए करता था। इस सिमकार्ड के जरिए वह अपने परिवार और दोस्तों से संपर्क बनाए रखता था और लगातार पुलिस की गतिविधियों के साथ-साथ अपने खिलाफ चल रही मीडिया रिपोर्टों पर भी नजर रखता था। वह अखबारों में भी अपने बारे में चल रही खबरें पढ़ता रहता था।

सीएम के बयान का खौफ और सरेंडर

जानकारी के अनुसार, अनवर के सरेंडर करने के पीछे एक बड़ा कारण मुख्यमंत्री मोहन यादव का सख्त बयान था। मुख्यमंत्री ने कहा था, "डकैत हो या डकैत के बाप, हम किसी को नहीं छोड़ेंगे।" इस बयान के बाद अनवर को यह डर सताने लगा था कि पुलिस उसका एनकाउंटर कर सकती है या उसकी संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर सकती है। इसी डर से उसने विदेश में भागने की बजाय इंदौर लौटकर कोर्ट में सरेंडर करने का फैसला किया। पुलिस के दबाव और बुलडोजर की कार्रवाई के डर ने उसे अंततः कानून के सामने झुकने पर मजबूर कर दिया।

20 से ज्यादा मामले और रासुका की तलवार

अनवर डकैत के खिलाफ इंदौर के विभिन्न थानों में कुल 20 से अधिक मामले दर्ज हैं। कुछ समय पहले उसे भारत विरोधी नारे लगाने के मामले में भी गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) भी लगाया था। पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था और उसकी पार्षदी भी खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। पुलिस अब उसकी संपत्ति कुर्क करने की भी तैयारी में थी। अनवर को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास मिनी गुप्ता की कोर्ट ने 8 सितंबर से पहले कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए थे, लेकिन संपत्ति जब्त होने के डर से उसने उससे पहले ही खुद को कानून के हवाले कर दिया।

वकील की वेशभूषा में सरेंडर

सरेंडर करने से पहले अनवर ने पुलिस को चकमा देने के लिए अपनी दाढ़ी और बाल कटवा लिए थे। शुक्रवार को वह कोर्ट नंबर 14 में पहुंचा और सरेंडर किया। जैसे ही उसके सरेंडर की जानकारी मिली, कोर्ट में भारी भीड़ जमा हो गई। कोर्ट ने उसे 8 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया है। पुलिस अब उससे पूछताछ करेगी ताकि उसकी फरारी में मदद करने वाले और अन्य आपराधिक गतिविधियों का पता लगाया जा सके। यह मामला दर्शाता है कि कानून का शिकंजा कसने पर अपराधी कितना भी दूर क्यों न भागे, वह आखिरकार बच नहीं सकता।

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