जागो ग्राहक जागो: सोने के दाम देकर पीतल मत खरीदो, जानिए कैसे होता है भारत में लाखों-करोड़ों का धोखा Aajtak24 News

जागो ग्राहक जागो: सोने के दाम देकर पीतल मत खरीदो, जानिए कैसे होता है भारत में लाखों-करोड़ों का धोखा Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज - आधुनिकता और फैशन के इस दौर में, जहाँ हर कोई जागरूक होने का दावा करता है, वहीं एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि उपभोक्ता अक्सर लालच और भरोसे के जाल में फँसकर धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं। खासकर सोने-चाँदी के गहनों के कारोबार में यह समस्या पूरे भारत में एक जैसी है। लोग अपनी मेहनत की कमाई से सोना खरीदते हैं और यह मानकर चलते हैं कि उन्हें शुद्ध आभूषण मिला है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कई बार सोने के दाम पर उन्हें पीतल या मिश्रधातु थमा दी जाती है।

गहने बनाने के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी

बाजार में 24 कैरेट सोने का मौजूदा मूल्य लगभग ₹98,000 प्रति 10 ग्राम है। जब इस शुद्ध सोने को गहनों में ढाला जाता है, तो उसे मजबूत बनाने के लिए इसमें 3 ग्राम चांदी या तांबे की मिश्रधातु मिलाई जाती है। इस प्रक्रिया में गहने का कुल वज़न 13 ग्राम होना चाहिए। लेकिन यहाँ ग्राहक को बड़ा धोखा दिया जाता है। उसे सिर्फ 10 ग्राम का गहना दिया जाता है, और बाकी 3 ग्राम सोना (जिसका मूल्य लगभग ₹29,400 है) व्यापारी अपने पास रख लेता है। इस बदले में सिर्फ ₹300 की मिश्रधातु मिलाई जाती है। इसके अतिरिक्त, गहने बनाने की मजदूरी (बनवाई) का पैसा भी अलग से वसूला जाता है। यह सीधा-सीधा गणित है कि ग्राहक अपनी खून-पसीने की कमाई से ₹29,400 मूल्य का सोना खो देता है और बदले में उसे महज़ ₹300 की धातु मिलती है।

रीवा-मऊगंज में फल-फूल रहा है यह कारोबार

रीवा और मऊगंज जैसे छोटे शहरों में यह कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है। यहाँ आए दिन नई-नई सोने-चाँदी की दुकानें खुल रही हैं। इनमें से कई व्यापारी एक साल के भीतर ही लाखों-करोड़ों की संपत्ति बना लेते हैं। इस कमाई का सीधा स्रोत गहनों की चमक से आकर्षित भोले-भाले ग्राहक हैं। अनुमान है कि इन ज़िलों में ऐसी दुकानों की संख्या अब सैकड़ों से हज़ारों तक पहुँच चुकी है, और अगर यह सिलसिला जारी रहा तो यह संख्या लाखों तक भी पहुँच सकती है। लोग अक्सर भरोसे में आकर निजी और असंगठित व्यापारियों से गहने खरीद लेते हैं, जहाँ वे आसानी से ठगी का शिकार बन जाते हैं। वहीं, जो ईमानदार और पंजीकृत व्यापारी हॉलमार्क प्रमाणित गहने बेचते हैं, उन तक आम ग्राहक पहुँच ही नहीं पाते।

असली धोखाधड़ी और समाधान

सबसे बड़ी धोखाधड़ी तब सामने आती है जब ग्राहक वही गहना कुछ महीनों या सालों बाद उसी दुकान पर बेचने जाता है। व्यापारी उसे गहने के मूल्य का केवल 70-75% ही भुगतान करता है, जिससे ग्राहक को दोहरा नुकसान होता है। यह समस्या केवल रीवा और मऊगंज की नहीं, बल्कि भारत के अधिकांश राज्यों और महानगरों में भी समान रूप से देखी जा सकती है। इस धोखे की सच्चाई तब सामने आती है, जब गहने को गलाकर उसकी शुद्धता की जाँच की जाती है। यह एक कड़वी हकीकत है कि ग्राहक की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सीधे व्यापारी की तिजोरी में चला जाता है। इस गंभीर समस्या से बचने के लिए, भारत के सभी उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की ज़रूरत है। हॉलमार्किंग का प्रमाणपत्र हमेशा माँगें, जो सोने की शुद्धता की गारंटी है। अगर आपको किसी भी तरह की धोखाधड़ी का शक हो तो तुरंत उपभोक्ता फोरम या प्रशासन से शिकायत करें। याद रखें, "जागो ग्राहक जागो" सिर्फ एक सरकारी नारा नहीं, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई और आपके अधिकारों की रक्षा का एक मजबूत संकल्प है।

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