क्यों अटकी हैं आपातकालीन गाड़ियां?
डायल 112 सेवा का मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति में नागरिकों को तुरंत सहायता पहुँचाना है, लेकिन रीवा में इसका मूल उद्देश्य अधूरा रह गया है। सूत्रों के अनुसार, नई गाड़ियाँ मुख्यालय में ही खड़ी हैं, जिससे सीमावर्ती इलाकों में पुलिस की पहुँच कम हो गई है। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहाँ नशे का कारोबार और छोटे-मोटे विवाद बड़े अपराधों का रूप ले रहे हैं। बरसात के मौसम में अक्सर खेत-खलिहानों और गाँवों में ज़मीनी विवाद और झगड़े होते हैं, जहाँ त्वरित पुलिस कार्रवाई की सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है। ऐसे में 112 की गाड़ियों की अनुपलब्धता से हालात और भी बिगड़ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर नहीं पहुँचेगी तो अपराधी बेखौफ होकर अपनी गतिविधियाँ जारी रखेंगे।
प्रशासन की चुप्पी और जनता के सवाल
जिले के जितने थाने हैं, उतनी गाड़ियाँ अब तक उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। इस कमी के कारण कई थानों से सूचना मिलने पर भी पुलिस दल को मौके तक पहुँचने में लंबा समय लग रहा है। इस संबंध में जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने भी स्थिति पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का यह मौन जनता के सवालों को और गहरा कर रहा है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या यह प्रशासनिक देरी है, या फिर कोई अन्य आंतरिक कारण है जिसकी वजह से गाड़ियों की तैनाती रोक दी गई है।
त्वरित कार्रवाई की मांग
रीवा की जनता की अपेक्षा है कि शासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लें। जनता ने माँग की है कि 112 की गाड़ियों को जल्द से जल्द थानों तक पहुँचाया जाए ताकि अपराधों पर लगाम लगाई जा सके और आपातकालीन स्थितियों में जनता को समय पर राहत मिल सके। यह सिर्फ रीवा की सुरक्षा का सवाल नहीं है, बल्कि सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण जनसेवा की विश्वसनीयता का भी सवाल है।