आधी रात थानों का जायजा, सुबह गोलीकांड स्थल का निरीक्षण
SP विवेक सिंह ने रविवार की रात को मनगवा, गढ़, सोहागी और चाकघाट सहित अन्य क्षेत्रों की पुलिस चौकियों और थानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों की सक्रियता और रात्रिकालीन गश्त व्यवस्था को करीब से परखा।
निरीक्षण की सबसे अहम कड़ी थी कटरा गोलीकांड स्थल पर उनका त्वरित पहुंचना। रविवार तड़के लगभग 5 बजे, SP सिंह घटनास्थल पर पहुंचे और वहां की सूक्ष्मता से जांच की। उन्होंने प्रारंभिक तथ्यों को गंभीरता से नोट किया और मौके पर मौजूद एसडीओपी मनगवा प्रतिभा शर्मा, थाना प्रभारी गढ़ अवनीश पाण्डेय और एएसआई एच.डी. वर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों से जानकारी ली।
इसके उपरांत सुबह 6 बजे, SP विवेक सिंह सीधे गढ़ थाना पहुंचे और वहां के रिकॉर्ड का गहन अवलोकन किया। उन्होंने अपराधियों की धरपकड़ की स्थिति, लंबित वारंटों की जानकारी और हालिया पुलिस कार्रवाई का ब्योरा लिया। SP ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी आपराधिक गतिविधि या अपराधी को किसी भी स्तर पर बख्शा न जाए।
अपराधियों पर शिकंजा: नशीले पदार्थों के तस्कर निशाने पर
पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह के निर्देशन में पिछले कुछ दिनों से रीवा जिले में अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई चल रही है। नशीले पदार्थों की तस्करी, शराब माफिया, गांजा तस्करों के साथ-साथ वारंटी और जमानती आरोपियों के खिलाफ भी पुलिस सख्त अभियान चला रही है। जिले भर की पुलिस टीमें दिन-रात अपराध नियंत्रण में जुटी हुई हैं, जिसका सीधा असर अपराधियों की धरपकड़ पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है।
वहीं, रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) गौरव सिंह राजपूत ने भी पूरे संभाग में कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि अपराधियों की कमर तोड़ना ही वर्तमान प्राथमिकता है।
जनसुनवाई और मानवीय संवाद पर SP का जोर, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका
SP विवेक सिंह अपराध प्रभावितों से सीधे संवाद कर रहे हैं। वे घटनाओं के तुरंत बाद पीड़ितों से शांतिपूर्वक मुलाकात कर न केवल उनकी समस्या को समझते हैं, बल्कि त्वरित कार्रवाई भी सुनिश्चित करते हैं। हाल के कई मामलों में देखा गया है कि समाचार पत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स में घटनाओं के प्रकाशन के बाद उन्होंने स्वयं संज्ञान लिया और ठोस कदम उठाए हैं।
हालांकि, कानून-व्यवस्था सुधारने की इन ईमानदार कोशिशों के बीच यह भी देखने में आ रहा है कि कई बार जिले की राजनीतिक इच्छाशक्ति ईमानदार और निष्पक्ष पुलिस अधिकारियों के कार्य में बाधा बनती है। कुछ मामलों में प्रशासनिक निर्णयों पर राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका भी जताई जा रही है, जो पुलिस के लिए चुनौती बन सकती है।
अब देखना यह होगा कि SP विवेक सिंह का यह सघन अभियान और जनता के बीच बढ़ता विश्वास किस हद तक पुलिस और प्रशासन को जनहित में कठोर निर्णय लेने में सक्षम बनाता है, और इसमें राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका सहयोगी बनती है या बाधक – इसका जवाब आने वाला वक्त ही देगा।