विकास की अंधी दौड़ में इस समय ग्रीष्म ऋतु में बारिश जलवायु परिवर्तन का संकेत sanket Aajtak24 News

 

विकास की अंधी दौड़ में इस समय ग्रीष्म ऋतु में बारिश जलवायु परिवर्तन का संकेत sanket Aajtak24 News 

चांपा  - यदि वृक्ष के जीवन का ध्यान पूर्वक अवलोकन किया जाए, तो हम पाएंगे कि वनस्पति अपने आप में प्रकृति की उन अद्भुत रचनाओं में से एक हैं जिसे प्रकृति ने हर प्रकार से मानव जीवन के कल्याण के लिए बनाया है। प्रकृति की गोद में जन्मे पेड़ - पौधे, वनस्पति किस प्रकार एक शिक्षक की भाँति हमें कई सारी चीज़ें सिखाते हैं, आज हम इस बात पर चर्चा करेंगे। हमने आजतक देखा है कि पेड़ फल - फूल, औषधियाँ, लकड़ी इत्यादि के स्रोत हैं, लेकिन आज हम पेड़ों को एक अलग नज़रिए से देखने जा रहे हैं, जहाँ वह प्रकृति के दूतों के रूप में मानवता के लिए कुछ उत्कृष्ट संदेश ले कर आये हैं। वृक्ष - वनस्पति प्रकृति की वह रचना है, जो मानव जीवन के लिए ना सिर्फ आधार और आवश्यक है बल्कि प्रेरणा का स्रोत भी है। जब बात प्रकृति से प्रेरणा लेने की आती है तो वृक्ष सबसे पहले स्थान पर हैं । सुंदर, मनमोहक हरे -भरे और आंखों को सुकून देने वाले यह वृक्ष अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए जीते हैं । अपने द्वारा पैदा किए गए फल - फूल, अनाज और असंख्य खाद्य भंडार भी वह खुद नहीं खाते, बल्कि उससे अन्य जीव-जंतुओं का भरण पोषण करते हैं। वृक्षों की निस्वार्थ सेवा भाव हम सभी के लिए अनुकरणीय है। यह दुनिया जहां मनुष्य हर संबंध स्वार्थ वश बनाता है, वहां हमें इन वृक्षों से सीख लेनी चाहिए। पेड़ - पौधे सदैव जंतुओं की सेवा करते हैं, चाहे बात प्राणवायु ओक्सिजन उपलब्ध कराने की हो, चाहे भरण पोषण की हो, वृक्षों के बिना हमारे अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इतने महत्वपूर्ण होने के बाद भी एक वृक्ष अपना जीवन सादगी से और विनम्रता से जीता हैं। वृक्ष में ऐसे कई सारे गुण है जो हमारे लिए अनुकरणीय है। आज हम उन्हीं की चर्चा करेंगे और जानेंगे कि वृक्षों से हम क्या सीख सकते हैं। तो आइए आज की चर्चा प्रारंभ करें और पहले बिंदु से शुरुआत करें। 

वनस्पति सिखाती हैं संघर्ष करना  

मित्रों, हम जब भी किसी सफल आदमी की सफलता के पीछे के संघर्ष की कहानी को सुनते हैं या पढ़ते हैं तो हम बहुत प्रेरित महसूस करते हैं। लेकिन हम यह भी जानते हैं कि संघर्ष करना अत्यंत कठिन है। हर कोई संघर्ष नहीं करना चाहता क्योंकि हम सभी अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना चाहते हैं। अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना हमें बहुत अच्छा लगता है। इसीलिए हम मेहनत की जगह आराम को चुनते हैं, परिश्रम की जगह आलस्य को और संघर्ष के स्थान पर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। पर क्या ऐसा व्यक्ति, जो मेहनत, संघर्ष और परिश्रम से भागता है वह सफल हो सकता हैं। 

जवाब हैं - नहीं

सफलता संघर्ष से मिलती हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण और सबसे बड़ी प्रेरणा है वृक्ष। अपने आसपास किसी विशालकाय पेड़ को देखकर आपको उसकी बड़ी काया का आभास तो होता है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि वह पेड़, जो आज आसमान की ऊंचाई को छू रहा है उसका विकास एक छोटे से बीज से हुआ हैं। उस छोटे से बीज ने अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हर दिन एवं हर क्षण संघर्ष किया है, कभी पानी के लिए, कभी सूर्य की रोशनी के लिए तो कभी अपनी जड़ों के लिए जमीन पाने के लिए। तभी जाकर वह अपने आकार से 100 गुना अधिक विशालकाय बन पाया हैं।

यह  सब  कैसे  हुआ 

क्या बीज से वृक्ष बनने की सफलता बनी बनाई थी जमीन की गोद में पड़े बीज ने अपने आप को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए। हवा, पानी, सूर्य की रोशनी को पाने की चेष्टा की और इन प्रयासों के कारण ही वह आज इस रूप में हमारे सामने खड़ा है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ वह बीच जो खुद को अपने हाल पर छोड़ दें और अपने विकास के लिए आवश्यक कारकों की प्रतिक्षा करता रहे, वह कभी विकसित नहीं हो सकता। वृक्ष अपने जीवन भर संघर्ष करते रहते हैं और मनुष्य को भी यह संदेश देते हैं। हमें वृक्षों से यह सीख लेनी चाहिए कि जीवन में सफल वही होता है जो संघर्ष करता हैं।

बदलाव को स्वीकार करने की कला सीखें पेड़ो से।

क्या आप आने वाले बदलावों को सहर्ष रूप से स्वीकार कर पाते हैं। यदि आप इस पर थोड़ा विचार करें तो आप पाएंगे कि आप बदलावों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते हैं। ऐसा इसीलिए क्योंकि मनुष्य के स्वभाव में असंतोष और ना बदलने की भावना निहित होती है। हम सदैव अपनी सुविधा क्षेत्र में रहना चाहते हैं और बदलना हमें अच्छा नहीं लगता। लेकिन संसार का नियम परिवर्तन का नियम है और जिसने अपने आप को इस परिवर्तन के अनुसार नहीं ढाला, वह अपने अस्तित्व को बरकरार नहीं रख पाता हैं। हम मनुष्य हर वक्त बदलाव का प्रतिरोध करते रहते हैं। सर्दी के मौसम में तापमान में आए बदलाव, अर्थात अत्यधिक ठंड हमें परेशान करती हैं, तो वहीं दूसरी तरफ गर्मी के मौसम में बढ़ता तापमान और मौसम के गर्म होने पर हम परेशान हो पड़ते हैं। हमारे ऐसे रवैये से हमारा ही नुकसान हैं। यदि समय के साथ बदलने और खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की प्रेरणा लेने की बात की जाए तो वनस्पति से बड़ा उदाहरण और कुछ नहीं हो सकता। आप बदलाव की इस प्रक्रिया को वृक्षों के माध्यम से बखूबी समझ सकते हैं। मित्रों, वनस्पति, पेड़ - पौधे बदलना जानते हैं। वह समय के साथ खुद को ढालना जानते हैं इसीलिए वह लंबे समय तक अपने अस्तित्व को बरकरार रखने में सफल हो पाते हैं। पेड़ - पौधे बदलते समय का कोई प्रतिरोध नहीं करते हैं। वह बिना विरोध किए स्वयं को सर्दी, गर्मी, धूप, वर्षा और पतझड़ के हिसाब से बदल लेते हैं। पतझड़ का मौसम आते ही वह अपने सारे पत्तों को गिरा कर, अपनी सभी शोभा, सुंदरता को छोड़कर ढूंढ का रूप ले लेते हैं। वहीं वसंत ऋतु आ जाने पर वह स्वयं को सुंदरता की चादर में ढक लेते हैं, नए पल्लव फल फूलों से स्वयं को सुशोभित कर लेते हैं।इसी प्रकार साल भर हर बदलते मौसम और हर छोटे-बड़े परिवर्तनों को स्वीकार करते हुए वह अपनी जगह पर खड़े रहते हैं। यह गुण हम सभी को परिवर्तनशील बनने का संदेश देता है। इससे हमें यह सीख मिलती है कि बदलाव को स्वीकार करने से ही हम विकास की ओर आगे बढ़ सकते हैं।


 

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