जिले में लोकसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछना शुरू suru Aaj Tak 24 News


जिले में लोकसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात बिछना शुरू suru Aaj Tak 24 News

रीवा - विंध्य क्षेत्र के रीवा जिले में तीन दलों में रोचक लड़ाइयां देखने को मिलेंगी दल के साथ-साथ रीवा में जातीय समीकरण भी विशेष रूप से देखा गया था और आगे फिर से रहेगा रीवा लोकसभा में कुल 17 लाख 46 हजार वोटर हैं जिसमें यदि जातीय समीकरण देखा जाए तो ब्राह्मण 5 लाख 25 हजार, पटेल 2 लाख 36 हजार, क्षत्रिय 1लाख 5 हजार , वैश्य 2 लाख 10 हजार , कुशवाहा एक लाख, मुस्लिम 95 हजार , अनुसूचित जाति 2 लाख 30हजार , अनुसूचित जनजाति 1 लाख 60 हजार तथा अन्य जाति 85 हजार इन सभी को मिला कर लगभग कुल 17 लाख 46 हजार मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे जिसमें वोटिंग प्रतिशत यदि न्यूनतम वोटिंग 52% होती हैं तो 9 लाख 79 हजार  यदि यदि अधिकतम वोटिंग होती है तो 11लाख 34 हजार के लगभग वोट पड़ेगा प्रतिशत भी बढ़ेगा विधानसभा चुनाव 2023 का यदि आकलन किया जाए तो  ब्राह्मण क्षत्रिय पटेल वैश्य कुशवाहा आदि चुनाव के नतीजों में बहुत बडा योगदान रखते है वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो सभी दलों मे ही आपसी भीतरघात देखने को मिलता है  किंतु भारतीय जनता पार्टी में यह विरोध खुलकर नहीं दिखता जबकि कांग्रेस में सर्वाधिक आंतरिक विरोध देखा जाता है यदि देखा जाए तो कांग्रेस पार्टी का संगठन भी जमीनी स्तर पर बीएसपी से भी कमजोर है वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी में टिकट के दावेदारों की संख्या काफी है जिसमें प्रमुख रूप से संगठन और वर्तमान सांसद के लोगों में लड़ाई देखी जा रही है जहां दीवारों पर संगठन और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ द्वारा दीवारों पर लेखन कार्य प्रारंभ है औसतन एक विधानसभा में लगभग 75 से 150 स्थान पर दीवारो में लेखन का कार्य प्रारंभ है वहीं दूसरी तरफ राजनीति के छात्र कहे जाने वाले छात्रों की स्थितियां ये है कि प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर तो छात्र नेता माना जाता है किंतु जमीनी स्तर पर जनता मे उनकी विशेष पकड़ नहीं है सर्वाधिक मतदाताओं में भारतीय जनता पार्टी की विभिन्न कार्य योजनाएं और प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और प्रदेश  नेतृत्व का जनता में विशेष रुझान देखा जा रहा है वहीं भारतीय जनता पार्टी से अधिकांश कर्मचारी शिक्षाकर्मी के साथ विभिन्न संविदा कर्मचारीयों में आक्रोश देखा जा रहा है वहीं दूसरी तरफ 20 वर्ष के भारतीय जनता पार्टी सरकार में सर्वाधिक सत्ता  तक पहुंचाने में अपना समय लगाने वाले शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका थी लेकिन इन शिक्षकों को आज तक किसी भी विद्यालय में ट्रेजरी पेमेंट नहीं किया गया और ना शासकीय किया गया वहीं दूसरी तरफ शासकीय स्कूल की संख्या निरंतर घट रही है और प्राइवेट स्कूलों की संख्या में वृद्धि हुई है जहां गांव में आज भी बेरोजगारों को 3000 से 5000 प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जाता है यदि बेरोजगार कर्मचारियो की पेंशन आदि इन सारी बातों को लेकर  यदि इनका विरोध खुलकर सामने आता है तो यह लड़ाई भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस में रोचक दिखेगी क्योंकि एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के सबसे प्रमुख संगठन के कार्यकर्ताओं पर भी आक्रोश दिख रहा है वही संगठन के प्रमुखों की ज्यादा चल नहीं रही है और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को भी सुविधा प्रदान नहीं की गई नाम न छापने की शर्त पर कई स्कूलों के आचार्य कह रहे हैं वही दुसरी ओर किसान भी रीवा जिले के आवारा पशुओं से काफी प्रताड़ित हैं वहीं दूसरी तरफ शिवराज सिंह की उपेक्षा की चर्चा भी जनता मे सुनाई देने लगी है यदि शिवराज सिंह की उपेक्षा जमीनी स्तर पर पहुंची तो लाडली लक्ष्मी और लाडली बहना के हितग्राहियों का वोट भी भारतीय जनता पार्टी से खिसकता दिख रहा है और यह वोट निकटतम प्रत्याशी कांग्रेस या दुसरी पार्टी की तरफ जाता दिखेगा आगे जनता यह मन बना कर बैठ गई है लेकिन कांग्रेस के नेताओं की निष्क्रियता के कारण खुलकर विरोध करने के लिए तैयार नहीं दिख रही है।

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