पासमांदा से ऊँचाई की दहलीज़ तक दाऊदी बोहरा समाज uchai par bhohara samaj Aaj Tak 24 news


पासमांदा से ऊँचाई की दहलीज़ तक दाऊदी बोहरा समाज uchai par bhohara samaj Aaj Tak 24 news 

 रतलाम  - पासमांदा की ऊँचाई को जानने से पहला जानना होगा कि आखिर यह पासमांदा है कौन ? और पासमांदा का अर्थ क्या है। भारत के पिछड़े मुसलमानो के उद्धार के उद्देश्य से गठित संस्था जिसकी स्थापना पटना में अली अनवर ने १९९८ में की थी। अनवर स्वयं ‘‘अंसारी’’ जाति के पिछड़े मुसलमान हैं। मुस्लिम समाज में भी उच्च और निम्न वर्ग होता है लेकिन यह आधार केवल पहचान के तौर पर ही होती है क्योंकि समस्त धार्मिक क्रियाकलापों में सभी मुस्लिमजन एक साथ खड़े होते हैं। सभी तबके या फिरकों की मान्यताऐं अलग हो सकती है लेकिन लक्ष्य और प्रार्थना का स्वरूप नमाज़, रोज़ा सब कुछ एक होता है। उसी पासमांदों में दाऊदी बोहरा समाज की कभी गिनती हुआ करती थी, क्योंकि दाऊदी बोहरा समाज जिस समय भारत में फैलना शुरू हुआ तब व्यापार को वरीयता देने वाले इस समाज को चन्द मुट्ठिीभर लोगों ने ही स्वीकार किया था और अपनी दृढ़ संकल्पिता, कर्म, ईमानदारी और व्यापार नीति के साथ सबसे अहम अपने धर्मगुरू के आदेश को पत्थर के लकीर की तरह मानना, इस समाज के विकास का मुख्य बिन्दु है। भारत में रहने वाले दाउदी बोहरा समाज की जड़े फातिमि युग अरब देश से जुड़ी हुई हैं, जब 18वें इमाम अल मुस्तानसिरबिल्ला ने यमन से अपने एक दाई (समाज के धर्मगुरू) को अपनी ओर से दावत (धर्म प्रचार) शुरू करने के लिए भेजा था, वह 1067/हिजरी सन् 460 ईस्वी में कैम्बे (आधुनिक खंभात, गुजरात) पहुंचे और जल्द ही स्थानीय शासकों सहित कई लोगों का दिल जीत लिया। उसी क्रमानुसार आज भी समाज के लोग अपने वर्तमान धर्मगुरू सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब, 53वांे धर्मगुरू के आदेश को यथावत मानते हैं और उनके बताए रास्ते पर जीवन यापन कर रहे हैं। समाज के लिए शि़क्षा और व्यापार सर्वोपरि है। समाज की औरतों का एक पहनावा जिसे रिदा कहते हैं एक ऐसा परिधान है जिससे समाज की औरते अलग पहचान भी बनाती है, और इस्लामी कानून के अनुसार जिस्म को मेहफूज़ भी रखती हैं। तो वहीं समाज के पुरूष धागे से बुनी हुई गोल टोपी पहनते हैं जो इनकी पहचान है। इस समाज को विशेष बनाती है समाज की एक खास बात, वह है ‘‘देशप्रेम’’, समाज का कोई भी व्यक्ति हो जिस देश में रहता है उसके कानून, का पालन करता है। जहां तक नज़र डाली जाए इस समाज के द्वारा कभी भी देश के कानून का उलंघन नहीं किया गया है। वर्तमान गरिमामयी पदों का आदर सतकार भारत में सन् 1067 राजा महाराजाओं के समय से समाज करता आया था और आज भी कर रहा है। दाऊदी बोहरा समाज के विकास का मुख्य कारण यही है कि वह अपने धर्मगुरू के आदेश की अव्हेलना कभी नहीं करता, साथ ही छोटे से छोटा स्थानीय संगठन भी यदि समाज के लोग सामाजिक कार्य के लिए बनाते भी हैं, तो उसके लिए भी सैयदना साहब से आदेश लेकर, और उनकी मन्शानुसार। व्यापार और शिक्षा को अपनी पूंजी मानने वाला यह समाज आज पासमांदी की हद से कहीं आगे निकलकर देश-विदेश में खास समाज का दर्जा हासिल कर चुका है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि शिक्षा और व्यापार वाला यह समाज दूसरों के लिए एक अनुठा उदाहरण बनकर खड़ा है। अपने सैयदना साहब की मंशानुसार समाज का हर व्यक्ति एक जैसा भोजन करे इसलिए एक समय की भोजन की थाली का अनुठा संकल्प पूरा करने में समाज का बच्चा-बच्चा दृढ़ संकल्पित है। अल्पसंख्यक होने के बाद भी इस समाज ने वो ऊँचाई हासिल की है जिस तक पहुंचना सामान्य बात नहीं। आज जब इस समाज ने अपना चैथा शिक्षण संस्थान मुम्बई के मरोल में बनाया तो अपनी रिती-निती के अनुसार प्रधानमंत्री पद की गरीमा को मान देते हुए सम्मान रखते हुए अपने शिक्षण संस्थान के भव्य उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री महोदय एवं महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री महोदय को आमंत्रित कर अपने देशप्रेम को प्रकट किया है। समय-समय पर देश पर प्राकृतिक आपदा आने पर समाज का सहयोग करना, वर्तमान समय में ई-सिगरेट और नशे को लेकर जागरूकता अभियान चलाना ही नहीं बल्की ऐसे कई कार्य हैं जो इस समाज को देश भक्ती के साथ जोड़े रखता है।

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