क्यों नहीं हटाए अवैध होर्डिंग - हाईकोर्ट | Kyu nhi hataye awaidh hording

क्यों नहीं हटाए अवैध होर्डिंग - हाईकोर्ट

दमोह शहर में अवैध होर्डिंग की भरमार को लेकर दायर याचिका पर हाईकोर्ट का नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर व नगरपालिका को नोटिस जारी

क्यों नहीं हटाए अवैध होर्डिंग - हाईकोर्ट

जबलपुर - दमोह ! दमोह शहर में अवैध होर्डिंग की भरमार को लेकर दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने प्रदेश के नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर दमोह, मुख्य नगरपालिका अधिकारी दमोह को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा गया है याचिका में उठाए गए बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायाधीश व जस्टिस विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी किए

दमोह के पत्रकार अनुराग हजारी ने याचिका के माध्यम से न्यायालय को बताया कि दमोह शहर की सीमा व सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले 10 वर्षों से भी अधिक समय से कतिपय व्यक्तियों द्वारा संबंधित विभागों की सक्षम स्वीकृति के बगैर कि अवैध रूप से कब्जा कर सड़क किनारे व जहां-तहां खाली पड़ी विभिन्न विभागों लोक निर्माण विभाग, शासकीय स्कूलों ,नजूल भूमि, उद्योग विभाग की भूमि, नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र वाली भूमि पर  होर्डिंग / लगाए जाते हैं इतना ही नहीं शहर के पेड़ों और विद्युत सप्लाई करने वाले खंभों पर भी बड़ी संख्या में लगाए जाने का कृत्य नगर पालिका व नजूल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों / कर्मचारियों की सांठगांठ के चलते लगातार जारी है इससे जहां शहर में अवैध  होर्डिंग/ फ्लेक्स की बाढ़ सी आ गई है वहीं शहर की सुंदरता भी बदरंग हो गई है शहर के लगभग हर चौराहे व मुख्य चौराहों के किनारे करीब 200 से होर्डिंग / फ्लेक्स समय कानून व्यवस्था को चलाते नजर आ रहे हैं संबंधित विभागों के प्रमुखों की अनदेखी व आपराधिक सांठगांठ के चलते सास की भूमियों पर पक्के लोहे के खंभे ग।ड कर अनाधिकृत कब्जा कर होर्डिंग / फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं जिससे ना  अवैध अतिक्रमण को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि नगर पालिका सहित शासन को प्रतिमाह लाखों रुपए की प्रत्यक्ष राजस्व हानि हो रही है याचिका में शहर की सुंदरता पर ग्रहण  बने अवैध होर्डिंग फ्लेक्सों को सख्ती से हटाने की मांग याचिका में की गई है याचिका में बताया गया कि आवेदक ने वर्ष 2019 में भी इस आशय की शिकायत कलेक्टर , सीएमओ सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मंत्रालय भोपाल तक की थी इसके बाद गत 2021 में पुनः अवैध होर्डिंग की शिकायत संबंधित अधिकारियों की थी जबकि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में शासन द्वारा होर्डिंग नियम 2016 बनाए गए हैं तथा उसके बाद शासन ने सभी कलेक्टरों को सख्त हिदायत दी है की अवैध होर्डिंग पर कड़ाई से कार्रवाई की जावे लेकिन कार्रवाई नदारद रही जिसके चलते उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी

याचिकाकर्ता पत्रकार अनुराग हजारी की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने न्यायालय में बताया कि याचिकाकर्ता ने नगर पालिका दमोह एवं कलेक्टर एवं सभी अधिकारियों को 2019 से लेकर लगातार शिकायत की है किंतु कोई कार्यवाही नहीं हुई जो कि ना केवल मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना है बल्कि होर्डिंग नियम तथा मोटर व्हीकल अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है याचिका में उठाए गए बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने मध्यप्रदेश शासन नगरी प्रशासन विभाग, कलेक्टर दमोह एवं नगर पालिका को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब पेश करने करने के निर्देश दिए हैं।

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