तपस्वीयों के हुऐ पारणे व बहुमान, आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ | Tapasviyo ke hue parne va bahuman

तपस्वीयों के हुऐ पारणे व बहुमान, आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ

आचार्य रवीन्द्रसूरीश्वरजी की जन्म जयंति मनायी हुई गुणानुवाद सभा

तपस्वीयों के हुऐ पारणे व बहुमान, आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ

राजगढ़/धार (संतोष जैन) - श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वाधान में गच्छाधिपति आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के आज्ञानुवर्ती मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज वैराग्ययशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री सद्गुणाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्रीजी म.सा., साध्वी श्री विमलयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में पर्युषण महापर्व पर श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में 16, चत्तारी अठ दस दोय एवं सामुहिक अट्ठाई तप व सामुहिक नागकेतु के अट्ठम तप के तपस्वीयों के पारणे प्रातः बेला में हुए । पारणे के पश्चात् सभी तपस्वीयों का बहुमान श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, कोषाध्यक्ष हुकमीचंद वागरेचा, ट्रस्टी मेघराज जैन एवं तीर्थ के महाप्रबंधक अर्जुनप्रसाद मेहता आदि ने किया । प्रातः की बेला में प्रभु श्री आदिनाथ भगवान एवं दादा गुरुदेव का अभिषेक श्री एस.एम. बाफना परिवार की ओर से किया ।

तपस्वीयों के हुऐ पारणे व बहुमान, आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ

आचार्य रवीन्द्रसूरीश्वरजी की जन्म जयंति मनायी हुई गुणानुवाद सभा

पाट परम्परा के सप्तम पट्टधर अर्हत् ध्यानयोगी गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का 67 वां जन्म दिवस भादवा सुदी पंचमी पर आज श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में गुणानुवाद सभा के साथ मनाया । साथ ही आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का पूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ । जन्म जयंति कार्यक्रम में आचार्य श्री रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के चित्र पर ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, कोषाध्यक्ष हुकमीचंद वागरेचा, ट्रस्टी मेघराज जैन एवं तीर्थ के महाप्रबंधक अर्जुनप्रसाद मेहता आदि ने माल्यार्पण कर 68 दीपक प्रज्जवलित किये । तत्पश्चात् मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने दोनों आचार्यभगवन्त को अपनी आदरांजलि अर्पित की । मुनि श्री वैराग्ययशविजयजी म.सा. ने कहा कि आचार्य श्री रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. हमेशा ध्यान साधना में लीन रहा करते थे । उन्हें संसारी चकाचौंध से कोई लेना देना नहीं था वे अन्तर ध्यानी थे । मुनिराज जिनचन्द्रविजयजी म.सा. ने कहा कि आचार्यश्री बहुत ही सहज और सरल व्यक्तित्व के धनी थे और मेरा उनसे बहुत ही कम समय का सानिध्य रहा पर जितना भी रहा उसमें उन्होंने मुझसे बहुत स्नेह रखा । मेने जब मुझे दीक्षा देने की बात कही तब वे बोले की मैं तुम्हारी दीक्षा में नहीं रहूंगा । साध्वी श्री विरागयशाश्रीजी ने कहा कि आचार्यश्री हमेशा ध्यान मग्न रहते थे । जबतक आत्मा स्वयं को नहीं पहचानती तबतक दूसरों की पहचान करने में दिक्कत होगी । हमें स्वयं की आत्मा को पहचाना है तो एकाग्र होकर ध्यान करना पड़ेगा । आचार्यश्री पूरी पूरी रात मंत्रों के जाप किया करते थे । बिना तपे आत्मा का कल्याण सम्भव नहीं । हमारी आत्मा 84 लाख जीव योनियों में घुमकर आयी है इस 84 के चक्कर से बचने के लिये और निकाचित कर्मो को तोड़ने के लिये श्रमण भगवान महावीरस्वामी ने सिर्फ तप का मार्ग बताया । इस अवसर पर ट्रस्टी मेघराज जैन ने कहा कि आचार्य रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. कुशल समाज संगठक थे । वे आचार्य पदवीं ग्रहण करना नहीं चाहते थे । उनका कहना था कि आचार्य पदवीं लेना महत्वपूर्ण नहीं है समाज की एकता ज्यादा महत्वपूर्ण है । आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. कभी किसी को निराश नहीं करते थे । दोनों भाई सरल स्वभावी थे । वे करुणा के अवतार थे । श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के विकास के लिये हमेशा लगे रहते थे । कोषाध्यक्ष हुकमीचंद वागरेचा ने कहा कि यह मेरे जीवन का सुखद संयोग है कि मैं भी दोनों आचार्यो के गृह नगर सियाणा से हुॅं । मैं श्री मगराजजी पोरवाल परिवार के सम्पर्क में रहा । पिताश्री के साथ मोहनखेड़ा आना जाना लगा रहता था । नथमलजी एवं मोहनलालजी दोनों भाई थे । इनकी मातुश्री ने दीक्षा के भाव प्रकट किये और दोनों भाईयों को कविरत्न आचार्य श्री विद्याचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. को व्होरा दिया । आचार्यश्री ने इन्हें धार्मिक शिक्षा देकर समाज को दो संत दिये जो आगे चलकर आचार्य पद को सुशोभित किया । मैं दोनों के सम्पर्क में बहुत रहा ।

तपस्वीयों के हुऐ पारणे व बहुमान, आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापूण्योत्सव प्रारम्भ हुआ

आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के अष्टान्हिका महोत्सव के अन्तर्गत प्रथम दिवस के अवसर पर आज दोपहर में गुरुपद महापूजन श्री लालचंदजी रायचंदजी वागरेचा परिवार सियाणा की और से किया गया ।

दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापुण्योत्सव आज भाद्रपद सुदी पंचमी शनिवार 11 से 18 सितम्बर तक श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट के तत्वाधान में मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज वैराग्ययशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री सद्गुणाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्रीजी म.सा., साध्वी श्री विमलयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में चल रहा है ।


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