किसी भी भाषा में पकड़ के लिए व्याकरण का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है | Kisi bhi bhasa main pakad ke liye vyakran ka gyan hona

किसी भी भाषा में पकड़ के लिए व्याकरण का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है

अभा साहित्य परिषद द्वारा हिंदी दिवस पर हिंदी कार्यशाला और काव्य पाठ कार्यक्रम में साहित्यकार विश्वदीप मिश्रा ने कहा

किसी भी भाषा में पकड़ के लिए व्याकरण का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है

मनावर (पवन प्रजापत) - अखिल भारतीय साहित्य परिषद मनावर के द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर शासकीय हाईस्कूल मनावर में हिंदी कार्यशाला और काव्य पाठ का आयोजन किया गया । जिसमें अतिथियों और वक्ताओ ने हिंदी लेखन और काव्य लेखन की जानकारी बच्चों को देते हुए काव्य पाठ भी किया । आयोजन के मुख्य अतिथि साहित्यकार गोविंद सेन ने हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी की विभिन्न विधाओं को आत्मसात कर लेखन किया जाय तो साहित्य की सच्ची सेवा होगी । उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से बच्चों को दोहा विधा से परिचित करवाया । विशेष अतिथि साहित्यकार स्वप्निल शर्मा ने हिंदी की व्यथा को कविता में पिरोते हुए कहा कि क्यों पैदा करते हो भाषा के नाम पर सीमा का विवाद /जब तक नहीं अपनाएंगे हम एक देश, एक भाषा का राग /सही अर्थों में तभी होगा कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक । विशिष्ट अतिथि‌ अखिल भारतीय साहित्य परिषद धरमपुरी इकाई अध्यक्ष ओमप्रकाश कुशवाह ने हिंदी दिवस मनाएं जाने संबंधी तथ्यों को कविता में प्रस्तुत किया । विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त नायब तहसीलदार निर्मल शर्मा ने अपने गीतों के माध्यम से हिंदी की महत्ता दर्शाई । कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षिका श्रीमती सीमा बालेश्वर ने की ।

 स्वागत भाषण देते हुए परिषद के महासचिव विश्वदीप  मिश्रा ने कहा कि किसी भी भाषा में पकड़ के लिए उसके व्याकरण का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। हमारी हिंदी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा समृद्ध भाषा है। गांधी जी के कई सपनों में से एक सपना यह भी था कि हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले,लेकिन उनका यह सपना अभी तक पूरा नहीं हो पाया। हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देने से यह पूरे देश को एकता में पिरोने का कार्य करेगी। उन्होंने गणेश जी और नेताओं में समानता बताते हुए अपनी व्यंग्य रचना में कहा कि नेताओं और गणेश जी में कई अक्स वैसे के वैसे हैं, तोंद गजानन की तरह और आश्वासन सूंड जैसे है। साहित्यकार नवीन अत्रे ने हिंदी में बिंदी (अनुस्वार) के महत्व पर प्रकाश डाला । आयोजन में दिपीका व्यास, कुलदीप पंड्या, सतीश सोलंकी,बंटी बम ने भी काव्य पाठ किया । आयोजन में शाला में अध्ययनरत छात्र अविनाश वसुनिया, हरीश भंवर और मनीष मंडलोई को काव्य पाठ करने पर प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम संचालन डॉ जगदीश चौहान और आभार परिषद अध्यक्ष राम शर्मा परिंदा ने जताया । कार्यक्रम में रमेश चंद्र कुशवाह,प्रकाश वर्मा,मनोहर सिंह परिहार, श्रीमती रेखा कनास, श्रीमती निर्मला अचाले, मुकेश मेहता आदि उपस्थित थे ।

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