किसानों की सभी फसलों पर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिले इस विषय को लेकर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन | Kisano ki sabhi faslo pr lagat ke adhar pr labhkari mulya mile is vishay ko lekar dharna

किसानों की सभी फसलों पर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिले इस विषय को लेकर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन

किसानों की सभी फसलों पर लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिले इस विषय को लेकर धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन

मनावर (पवन प्रजापत) - भारतीय किसान संघ द्वारा भारतीय किसानों के द्वारा चलाए जाने वाला एक मात्र गैर राजनीतिक एवं राष्ट्रीवादी अखिल भारतीय किसान  संगठन है।जो समय-समय पर किसानों की समस्याओं को उठाता है। और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से शासन एवं प्रशासन के समक्ष रखता है। एक सुई एवं माचिस से लेकर हवाई जहाज बनाने तक की अधिकतम खुराक मूल्य एम.आर.पी .लागत के आधार पर निर्धारित होती है। जबकि किसानों की कुछ फसल का समर्थन मूल्य (एम.एस.पी.) तय किया जाता है,और उसमें भी कुछ फसलों को कोई समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है।आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर भी किसान गरीब से गरीब होकर  कर्ज  में दबा जा रहा है। फिर भी सरकारों का ध्यान कृषि विज्ञानि विज्ञानिको  को कृषि उत्पादों को बढ़ाने पर है ,न कि किसानों की उपज का लाभकारी मूल्य देने पर है।हम अपना अधिकार मांगते हैं, हमें हमारी उपज का उत्पादन  लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य दिया। जाए अब समय आ गया है हमारी उपज का सही दाम का आकलन करवा कर लेने का भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय आवाहन पर भारत के 525 जिलों में एक साथ एक समय पर आदरणीय नरेंद्र मोदी जी माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली के नाम से ज्ञापन देना एवं धरना प्रदर्शन 8 सितंबर 2021 को जिला केंद्रों पर करना इसी तरांतमई में अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय स्वराज्य मनावर के परिसर में दिनांक 8 सितंबर 2021 को समय 11 बजे धरना प्रदर्शन रहेगा। जिसमें मनावर जिले के धर्मपुरी, बाग, गंधवानी, उमरबन, मनावर ,कुक्षी,  डही, निसरपुर के समस्त किसान बंधुओं से अपील है। कि समय पर आकर किसानों की ताकत दिखाएं ।तुम केंद्र सरकार को आधा करें कि अगर इस ज्ञापन के माध्यम से 10 दिन में लाभकारी मूल्य पर विचार नहीं होता है, तो मजबूरन किसानों को खेती छोड़ कर रोड पर आने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। किसानों को आदान पूर्तिकरता उनकी उपज का व्यापार करने वाले तथा उद्योग करने वाले फल फूल रहे हैं एवं संपन्न हो रहे हैं। लेकिन स्वयं अन्नदाता किसान आज भी कर्ज में डूबा एवं गरीब से गरीब होते जा रहा है। इस ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना मांग को मनवाना हमारा मौलिक अधिकार है। 

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