मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हस्तकौशल विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़ कला शिविर 'निस्पन्द' का अवलोकन किया | CM shivrajsingh chouhan ne hastkoshal vimukt dhumakkad or ardhdhumakkad kala shivir

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हस्तकौशल विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़ कला शिविर 'निस्पन्द' का अवलोकन किया

मुख्यमंत्री श्री चौहान जनजातीय संग्रहालय, भोपाल में कालबेलिया घुमक्कड़ समुदाय के हस्तकौशल विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़ कला शिविर 'निस्पन्द' का अवलोकन किया 

मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने हस्तकौशल विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्धघुमक्कड़ कला शिविर 'निस्पन्द' का अवलोकन किया

भोपाल - मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में आयोजित इस शिविर में कालबेलिया समुदाय द्वारा निर्मित गुदड़ी, मनका आभूषण,कांच के कलात्मक कार्य, सुरमा निर्माण, तथा देशज व्यंजनों का अवलोकन किया।   चिन्हारी सोविनियर शॉप पर उपलब्ध होंगे कालबेलिया समुदाय के उत्पाद प्रमुख सचिव संस्कृति तथा जनसम्पर्क श्री शिव शेखर शुक्ला ने मुख्यमंत्री श्री चौहान को अवगत कराया कि कालबेलिया समुदाय गुदड़ी के साथ-साथ अन्य वस्त्र बनाने में निपुण हैं। इस समुदाय द्वारा बनाये गये गुदड़ी तथा अन्य वस्त्रों की डिजाइनिंग के लिए फैशन डिजाइनर्स को समुदाय के कलाकारों से जोड़ा जाएगा। फैशन डिजाइनर्स के माध्यम से मार्केटिंग की गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इससे समुदाय की आय में वृद्धि के उद्देश्य से यह गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री मध्यप्रदेश जनजातिय संग्रहालय की चिन्हारी सोविनियर शॉप के माध्यम से भी की जाएगी। मनका आभूषण,सुरमा बनाने में निपुण हैं कालबेलिया साज-सज्जा सामग्री तथा जीवन की जरूरतों के लिए अन्य सामान जैसे मनका आभूषण, कांच पर कलात्मक कार्य, सुरमा,जड़ी-बुटी और पत्थर टांकने जैसे कार्य भी समुदाय द्वारा कलात्मक रूप से किये जाते हैं। इन उत्पादों को शिल्प कला के रूप में स्थापित करने और नगरीय समाज में इसे प्रचारित कर स्वीकार्य बनाने के लिए भी प्रयास आरंभ किये गये हैं।  मध्यप्रदेश के कलाकारों को इन कार्यों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए राजस्थान से कालबेलिया समुदाय के ग्यारह कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। पहले कला शिविर में प्रदेश के 30 कलाकारों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 

03 सितम्बर 2021 तक जारी रहेगा कला शिविर  उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 30 घुमन्तु अर्द्धघुमन्तु और विमुक्त जातियाँ निवासरत हैं। इन जनजातियों की सांस्कृतिक परंपरा का अब तक किसी भी प्रकार का अध्ययन नहीं हुआ है। उनके कला वैशिष्ट का रेखांकन भी नहीं हुआ है। संस्कृति विभाग ने ऐसे समुदायों की कला प्रतिभा या कलात्मक प्रतिभा को एक शिल्प परंपरा के रूप में स्थापित करने के लिए कार्य आरंभ किया है। इन समुदायों की जातीय विशिष्टता के रूपाकारों को केन्द्र में रखकर कला शिविरों की एक श्रृंखला आरंभ की गई है। पहले शिविर के रूप में मध्यप्रदेश की कालबेलिया घमन्तू जनजाति की गुदड़ी निर्माण को रेखांकित करने के उद्देश्य से कला शिविर का आयोजन 25 अगस्त से आरंभ हुआ है। जो 03 सितम्बर 2021 तक जनजातीय संग्रहालय में जारी रहेगा।

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