गुलामी के बंधन से तो छूट गए, विकारों की गुलामी से छूटे तभी स्वतंत्र कहलाएंगे | Gulami ke bandhan se to chhut gaye

गुलामी के बंधन से तो छूट गए, विकारों की गुलामी से छूटे तभी स्वतंत्र कहलाएंगे 

एक शाम तिरंगे के नाम कार्यक्रम में ब्रम्हाकुमारी सुंदरी दीदी ने कहा

यशुदास एंड मुकेश फैंस क्लब के गायकों ने देशभक्ति गीतों की दी प्रस्तुतियां

गुलामी के बंधन से तो छूट गए, विकारों की गुलामी से छूटे तभी स्वतंत्र कहलाएंगे

मनावर (पवन प्रजापत) - धर्म व पूजा पद्धतियों की राहें चाहे अलग हो सकती है लेकिन सभी की मंजिल एक ही है वह है परमपिता परमात्मा l सबका मालिक एक ही है l अनेक लोगों के त्याग बलिदान और समर्पण के फलस्वरुप हम गणतंत्र दिवस मना रहे हैं l यह सभी वीर पुरुष अध्यात्म से परिपूर्ण थे l ऊर्जा, उत्साह, उमंग .वीरता ,हिम्मत और जीवन तक बलिदान करने की सोच के लिए आध्यात्मिक होना जरूरी है l हम गुलामी के बंधन से तो छूट गए लेकिन विकारों की गुलामी से छूटे तभी स्वतंत्र कहलाएंगे l उक्त संबोधन प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम एक शाम तिरंगे के नाम मैं केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी सुंदरी दीदी ने दिए l कार्यक्रम में स्थानीय यशुदास एंड मुकेश फैंस क्लब के  गायको ने देशभक्ति से परिपूर्ण नगमे पेश किए l 

गुलामी के बंधन से तो छूट गए, विकारों की गुलामी से छूटे तभी स्वतंत्र कहलाएंगे

 कार्यक्रम का शुभारंभ अभा सीरवी महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश मुकाती, समाजसेवी कैलाश राठौड़, बीआरसीसी    अजय मूवेल ,क्लब के सहयोगी  और सामाजिक कार्यकर्ता विश्वदीप मिश्रा ,साहित्यकार स्वप्निल शर्मा एवं जन शिक्षक प्रकाश वर्मा ने दीप प्रज्वलन के साथ किया l स्वागत भाषण देते हुए विश्वदीप मिश्रा ने कहा कि संगीत आत्मा से परमात्मा के मिलन का सहज साधन है l उन्होंने कहा कि सब धर्मों में राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है l 

  इन्होंने बांधा समां -  कार्यक्रम में गायक कलाकारों ने देशभक्ति से ओतप्रोत नगमे पेश कर  ठिठुरन भरी ठंडी रात में देर तक श्रोताओं में जोश व गर्माहट भरे  रखी l गायक गणेश शिंदे ने अब के बरस तुझे धरती की रानी प्रस्तुत कर भारत के उज्जवल भविष्य की कामना की l राजा पाठक ने कर चले हम फिदा जानो तन साथियों पेश कर शहीदों को नमन किया l संगीता  सवनेर ने दे दी हमें आजादी बिना खडक बिना ढाल के माध्यम से अहिंसा की   महत्ता रेखांकित की l सतीश सोलंकी ने जब चिट्ठी आई है गीत प्रस्तुत किया तो सभी श्रोताओं की आंखें नम हो गई l बालक दक्ष शिंदे के वंदे मातरम गीत पर हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा l इनके अलावा समीर खान ने जिंदगी मौत ना बन जाए राकेश अत्रे सिंघाना ने ए मेरे प्यारे वतन, प्रफुल्ल सोनी ने मेरा मुल्क मेरा देश , कैलाश काग अजंदा ने मेरे देश की धरती सोना उगले गीत  तथा मुकेश मेहता ने देशभक्ति पैरोडी पेश कर श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति  की अलख  देर रात तक जलाए   रखी l कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और गायक कलाकारों को आध्यात्मिक पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया l कार्यक्रम का संचालन सतीश सोलंकी एवं आभार ब्रह्माकुमार गणपत मंडलोई और सोनाली दीदी ने माना l कार्यक्रम में मनावर सहित सिंघाना उमरबन आदि क्षेत्रों के भैया और बहन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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