घर पर एकमात्र कमाऊ बेटे की असमय मृत्यु से दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा था - रेशमबाई | Ghar pr ek matr kamau bete ki asamay mrityu se dukho ka pahad tut pada tha

घर पर एकमात्र कमाऊ बेटे की असमय मृत्यु से दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा था - रेशमबाई

मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना से मिला सहारा*

घर पर एकमात्र कमाऊ बेटे की असमय मृत्यु से दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा था - रेशमबाई

उज्जैन (रोशन पंकज) - शहर के जयसिंहपुरा में रहने वाली 55 वर्षीय रेशमबाई और उनके परिवार का गुजारा जैसे-तैसे चलता था। परिवार में एक बेटा था जो एकमात्र कमाने वाला था। वह दुकानों पर छोटा-मोटा काम करके जैसे-तैसे घर चलाता था। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन के चलते बेटे का कामकाज पूरी तरह से बन्द पड़ गया था, लेकिन रेशमबाई के परिवार पर असल दु:खों का पहाड़ तो अब टूटने वाला था। लॉकडाउन की अवधि में ही उनके बेटे की अचानक स्वास्थ्य खराब होने से असमय मृत्यु हो गई।


एक तो पहले से ही लॉकडाउन में आर्थिक तंगी के कारण घर में काफी तनाव चल रहा था, ऊपर से अचानक आ पड़े संसार के सबसे बड़े दु:ख ने रेशमबाई और उनके परिवार को पूरी तरह से तोड़ दिया था। जब अनलॉक की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई तो रेशमबाई की बहू ने घर चलाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली, लेकिन उनकी काफी कोशिशों के बावजूद घर की आर्थिक स्थिति पहले की तरह सामान्य नहीं हो पा रही थी। घर में राशन की किल्लत दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी और बाजार से महंगे भाव में राशन खरीदना रेशमबाई के परिवार के बूते से बाहर हो गया था।


ऐसे में मुख्यमंत्री अन्नपूर्णा योजना ने रेशमबाई और उनके परिवार को संबल के साथ-साथ सहारा दिया। रेशमबाई इसके लिये मुख्यमंत्री को धन्यवाद देती हैं। उनका कहना है कि उनका बेटा तो अब कभी वापस नहीं आयेगा, लेकिन उन्हें और उनके परिवार को दो समय का भोजन उपलब्ध हो सके, ऐसी योजना लाने के लिये रेशमबाई मुख्यमंत्री को कोटि-कोटि धन्यवाद देती है।

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