कोरोना की मार से जूझ रहे कुम्हार, आर्थिक तंगी से उबरने की जगी उम्मीद | Corona ki maar se jujh rhe kumhar

कोरोना की मार से जूझ रहे कुम्हार, आर्थिक तंगी से उबरने की जगी उम्मीद 

कोरोना की मार से जूझ रहे कुम्हार, आर्थिक तंगी से उबरने की जगी उम्मीद

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - कोरोना की मार से जूझ रहे कुम्हार दिवाली में अच्छे व्यापार की उम्मीद के साथ तेजी से काम कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दिवाली उन्हें आर्थिक संकट से उबार देगी। हालांकि कोरोना के कारण प्रर्याप्त बसों का परिचालन न होने की वजह से कुम्हारों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। कुम्हार प्रमोद ने बताया कि वह जबलपुर से रंग सहित अन्य सामान लाते हैं, लेकिन इस बार बसों का परिचालन प्रर्याप्त न होने से दिक्कत हो रही है। निजी वाहन काफी किराया ले रहे हैं वहीं रगों के कीमत भी बहुत बढ़े हैं । मन्जू चक्रवर्ती का कहना है कि कोरोना के कारण उनके व्यवसाय पर काफी प्रभाव पड़ा है। अब सारी उम्मीद दिवाली पर्व पर टिकी है। हालांकि कुम्हारों ने जैसे-तैसे इंतजाम कर दीपक बनाने का कार्य शुरु कर दिया है। पूरे दिन मेहनत करके चाक से मिट्टी को आकार दे रहे है। दीपोत्सव के लिए लोग घरों की सफाई के साथ ही रंगाई पुताई में व्यस्त हैं। वहीं कुम्हार भी तेजी से दीया बनाने में जुटे हैं। जनपद मुख्यालय समनापुर के कुम्हार मोहल्ला सहित अन्य जगहों पर दिन रात कुम्हार मिट्टी के दिए बनाने में जुट हुए हैं। कुम्हारों ने बताया यह उनका पुश्तैनी काम है। महंगाई के दौर में मिट्टी भी महंगी आ रही है। चाक से मिट्टी के दीया समेत अन्य बर्तन बनाने का काम किया जा रहा है।

कोरोना की मार से जूझ रहे कुम्हार, आर्थिक तंगी से उबरने की जगी उम्मीद

अपने घर को करें दीया से रोशन


रोशनी के पर्व दीपावली की तैयारियां घर-घर में शुरू हो चुकी हैं। दीपोत्सव पर्व पर धन लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। वहीं घरों में आकर्षक साज-सज्जा की जाती है। इस बार अगर हम अपने घरों में अधिक से अधिक दीप जलाएंगे तो ही कुम्हारों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी।

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