"बप्पा मोरीया पार्ट-2 वो छोटे छोटे कदम" | Bappa moriya part 2 wo chhote chhote kadam

"बप्पा मोरीया पार्ट-2 वो छोटे छोटे कदम"

लेखिका - निवेदिता सक्सेना क्या कहती है चलो देखते है

"बप्पा मोरीया पार्ट-2 वो छोटे छोटे कदम"

सूरत (प्रवीण शाह) - "श्री गणेश "सबके संकटों को हरने वाले विघ्नो को दुर करने वाले,मंगल मूर्ति का पवित्र मन से ध्यान ही एक संतुष्ट भाव प्रदान करता है। ऐसे मे गणेश चतुर्थी मे गणेश जी की स्थापना एक सुरम्य वातावरण बना देती है ओर सत्यता ये हैं कि ,कोरोना संक्रमण मे भी विघ्न्ह्र्ता का आना कलयुग से सतयुग की वापसी का संदेश दे रहा।

लेकिन कब कितना समय लगेगा ये कहना कोरी कल्पना मात्र लगेगा,लेकिन आस्था ओर विश्वास कायम हैं।

बहरहाल, वर्तमान मे तेज बदलाव के दौर से गूजरते हुये कई कटु सत्य को स्वीकार करना पड़ रहा चाहे राष्ट्रीय हो ,राजनीतिक, या समाजिक इन सबका असर पड़ रहा आर्थिक संकटों को खैर जब भी कोई बढ़ी समस्या आती हैं तो समस्याओ का ढ़ेर लग ही जाता हैं तब जबकि हम स्वयं पूर्णत: मानसिक विकारो से ग्रस्त हो।

कई वर्षो से बच्चो के क्षेत्र मे कार्य करते हुये हर बार एक नयी चुनौती को देखा हैं ओर ये कटु अनुभव को भी स्वीकारा कि भारत में बच्चो व युवाओ की प्रगति क्यो रुकी हुई हैं, क्यो  "नन्हे कदम" बढने के बाद भी युवा होकर गिर रहे। हँसती खेलती दूनियाँ, आँसुओ को ढाल बनाये बढ रही हैं क्यो उन्हे बार बार भीख माँगने ओर बाल मजदूरी मे जाना पड़ रहा।उन्हे देखने ओर उनका संरक्षण करने वाले जिम्मेदारियो को पेपर मे छपवा कर एक नयी व्यवस्था का माखौल उडाकर ,अपनी झूठी जिम्मेदारी समर्पित कर रहे। मन कचोटता हैं ये सब प्रत्यक्ष देख कर । फिर इन झूठी व्यवस्था का विरोध करना अब तक एक स्व प्रयास या स्वय का माखौल उडवाना ही नजर आया। फिर सत्य भी यही है कि उपरी तन्त्र ही अगर स्वच्छ ना हूआ तो बाकी सब बच्चो की डरावनी कहांनी मात्र बन जायेगा जिसमे भुत ,प्रेत पिशाच जिन्न आदि सभी वही पात्र बन जायेंगे जो उनके स्वस्थ भविष्य को डकार गये। हमारे नन्हो  के नाम से कई योजनाये ओर उनके हिस्से का सब अपनी झोली मे भरकर बैठ गये उन्हे लगा किसी ने देखा ही नही ओर फिर कोरोना दौर मे सरकार ने भी अपना खजाना गलती से कई अपराधिक जिम्मेदारो के आगे खोल दिया । जिनकी आंखे फिर कैसे कागजो पर झूठी कलम चला कर उन नन्हो के हिस्से को चपत करने मे आधी सक्षम हुई। क्योंकि विश्वास अभी भी बाकी है। 

फिलहाल,इस पेंड़मिक दौर में सैकडों भारतीय नन्हे भूख ओर परिवार के पालन पोषण मे खुद को झौक दिए वही  नन्हो की दुनिया का एक वर्ग मोबाइल या लैपटॉप मे ऑन लाईन  स्टडी को समझने की चेष्टा कर रहा ।

बहरहाल,बप्पा जी के नाम से लगने लगा कभी ये विघ्न भी हर लिया जायेगा क्योंकि आस्था व कोशिश रुकेगी नही तो परिणाम पूर्णत: फलदायी ही होगा ।

वही मेरी भी लगातार यही हाल देखते देखतें सिस्टम से विश्वास उठने लगा था लेकिन फिर कभी तो सवेरा होगा की तरह कुछ उम्मीद बन्धने लगी ।बात कुछ इस प्रकार हुई हमारा पुलिस प्रशासन से उठता विश्वास जो स्वाभविक था अब तक के विश्वास ओर भुमिका को देखकर मे भी नन्हो के लिये लिख लिख कर उनके हक का दिलवाने की चेष्टा करते करते थक सी गयी ओर उम्मीद से परे हो गयी थी। स्थिति ये थी कि लग रहा था नन्हो की न्यायिक भुमिका को नंन्हो की तरह भुला दिया जा रहा ।लेकिन कुछ ऐसा घटा की पुर्व में किये प्रयास को वर्तमान मे धीरे से सपनो को जमीन पर उतार रहा। यही प्रयास हमारे जिले के पुलिस उच्च अधिकारी ने  लिये। लगातार सहयोग पुर्ण अधिनियमों का  वास्तविकता के साथ पालन करते हुये  एक सहयोगातम्क रवइए के साथ मेरी अब तक चल रही नकारात्मक पुलिस तन्त्र की मानसिकता को स्वच्छ बना रहा । क्योंकि अब तक के प्रयास जवाब दे गये थे वही बहुत कुछ हारा हूआ सा प्रतित होने लगा था। ऐसे मे नव- पदस्थ पुलिस उच्च अधिकारी ने जब अपनी सशक्त जिम्मेदारी प्रत्यक्ष एहसास हूआ कि जिले के बच्चो की संरक्षण की भुमिका को मजबूती पुलिस तन्त्र द्वारा  संरक्षण के साथ उनके ,बाल भावुक मन को भी समझ रहा।

खेर लगातार कोशिश व प्रत्यक्ष  संकटों का सामना  करने की एक कोशिश मे लग गये। तब लगा जैसे नन्हो के कदमो मे जान आ जायेगी ।ओर वह सुरक्षित उड़ान भर सकेंगे। 

जीवन की बहती नदियाँ की धार मे रुकावट तो आयेगी ही लेकिन नदी रूकती कहाँ वह चट्टानों को लाँघ कर दौड़ती जाती है, प्रकृति का नियम आत्मसात किये ।वैसे ही मानव जीवन संकटनाशक विघ्नहर्ता गणेश जी नन्हो के बाल मन को कही न कही से संरक्षण व पोषण प्रदान करते है माध्यम कोई भी हो सकता। 

           "जिम्मेदारी हमारी"

गीतोपदेश के अनुसार कर्म किये जाए फ़ल ईश्वर पर छौड़ दिया जाए। छोटे छोटे कदमो की कोशिश जरुरी हैं सफलतम परिणाम मिलेगा ही।

Post a Comment

0 Comments