शराब माफिया के दबाव में आकर टुकड़ों की कार्यवाही | Sharab mafiya ke dabav main akar tukdo ki karyavahi

शराब माफिया के दबाव में आकर टुकड़ों की कार्यवाही

70 पेटी शराब जप्त होने की चर्चा पुलिस ने तीन मामले दर्ज कर 13  पेटी की  जब्ती बताई

3 को बनाया गया आरोपी एक ही व्यक्ति के नाम पर वाहन 

शराब माफिया के दबाव में आकर टुकड़ों की कार्यवाही

जबलपुर (संतोष जैन) - शहपुरा रेलवे स्टेशन के पास सुबह पेट्रोलिंग के दौरान  पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर बोलेरो जीप रोक कर उनमेंढोल  रही शराब जप्त की  गई शराब 70 पेटी होने की चर्चा थी लेकिन शराब माफिया के दबाव में आकर पुलिस ने   टुकड़ों में कार्रवाई करते हुए तीन अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर कुल 13 पेटी जप्त करना बताया है इनमें पानी और सोडा की बोतल की पेटियां भी शामिल है माफिया के दबाव के चलते  पुलिस ने अलग-अलग मामले दर्ज कर धारा 34
1 लगाई जबकि 34
2 के तहत कार्यवाही की जानी थी कारवाही के दौरान वाहन चालकों द्वारा मोबाइल पर किसी  राजनीतिक दल के नेता से पुलिसकर्मियों की बात कराई गई उसके बाद पुलिस मामले में फंसती हुई नजर आई और शराब माफिया को बचाने के लिए नया फॉर्मूला अपनाते हुए अलग-अलग स्थानों से तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए 


ढाबों पर बिकती है शराब


 पुलिस लेती है ढाबों से हफ्ता 


जंगल में बन रही थी अवैध शराब


  पुलिस ने शराब की पेटी भी की अंदर 


शराब माफियाओं के आगे  नतमस्तक पुलिस 


 पुलिस ने खाए पैसे   माफियाओं से पुलिस की साथ घाट 

शहपुरा पुलिस करा रही कई अवैध काम वसूली करती है पुलिस

 माफियाओं से मिलीभगत रात में निकलता है माल


 गाड़ियों की नहीं होती  कोई जांच



 पूरा सेटिंग का है खेल  अवैध शराब बेचने पर नहीं होती कोई भी कार्रवाई


  जब दुकानें बंद है तो  दारू कहां से आ रही  है


 यह जांच का विषय है क्या वेयरहाउस से माल तो नहीं निकल रहा है दिन और रात


 यह विषय है जांच का


 सेटिंग बड़ी है  दारु की दुकान  और दारू  बेचने पर शासन को भी होता है फायदा

 शासन नहीं करती दारू की दुकानों और दारू को बंद 

सबका परसेंट तय है 

.दारू की दुकानों में  कई पार्टनर


 नकली दारू भी  बनाते हैं लोग

 दारू की उपयोग की गई खाली बोतलों में भरी जाती है नकली दारू

 लोग पीते हैं धड़ल्ले से जो बोतल 400 में मिलती थी अब वह ब्लैक से बारह सौ में मिल रही है 


जो पेटी 3000 में मिलती थी अब वह 8000 में मिल रही है 


कहते हैं लोगों के पास खाने-पीने की व्यवस्था नहीं है तो लोग दारू कहां से पी रहे हैं 

और कहां से आ रही   प्रशासन आंख बंद कर क्यों बैठा हुआ है


 मिलीभगत होती है  आबकारी विभाग लेता है मोटी रकम शराब माफियाओं से निभाते हैं दोस्ती

 जग जाहिर है पुलिस के बिना कोई काम नहीं होते हैं

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