मंडियों के बन्द होने से किसान की फ़सल हो रही खराब, लाखो के नुकसान की आशंका
बरमण्डल (नीरज मारू) - कोरोना वाईरस संक्रमण मे 21 दिन के देशव्यापी लाकडाउन से जहा मजदुर एंव रोजमर्रा के व्यापार पर आश्रित वर्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ
है। वही किसान वर्ग भी इस देशव्यापी लाकडाउन मे मुसीबत की मार से दो चार हो रहा है। इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते जहा रबी एंव खरीफ की फसल को अधिक नुकसान नही हुआ। कुछ किसानो ने पानी की अधिकता को देखते हुये टमाटर,धनिया,गोबी जैसे सब्जीया भी बडी मात्रा मे लगा दी थी लेकिन अधिकांश
स्थानो पर सब्जीया मंडी बंद है तो संपुर्ण लाकडाउन के चलते बाजार मे भी किसान सब्जीया नही बेच पा रहा है।
किसान तुलसीराम मावर एंव गोंविद मावर ने लाकडाउन के चलते हो रहे नुकसान की आपबिती बताई। किसान तुलसीराम परमार ने बताया की पिछले दो तीन वर्षो से खेती मे अधिक नुकसान हो रहा था। इस बार अच्छी बारिश के बाद 2.5 बिघा के खेत मे पत्ता गोबी लगाई है साथ ही 2 बिघा के खेत मे टमाटर लगाये है। दोनो फसल पक कर तैयार हो चुकी है। लेकिन इंदौर,रतलाम जैसी बडी सब्जीया मंडी बंद है ऐसे मे सब्जीया कहा बेचे दोनो
फसले यदि 10 दिन मे नही बिकी तो इन्हे खेतो मे ही फेकना पडेगा। गोबी की उपज बेचने पर 2 से 3 लाख एंव टमाटर बेचने पर करीब 1 लाख रू की आमदानी हो
जाती जिससे मै अपना कर्जा आसानी से चुका सकता था। लेकिन अब क्या करे।
वही किसान गोंविद मावर ने 2 बिघा मे धनिये की फसल लगाई थी जो पुरी तरह से पक कर तैयार हो चुकी है। लेकिन लाकडाउन मे मंडीया बंद होने से कोई भी
व्यापारी फसल खरीदने को तैयार नही है जबकी पिछले वर्ष ये हालात थे की व्यापारी आगे रहकर फसल खरीदने के लिये किसानो को फोन लगाते रहते थे। एक दो नही बल्कि क्षैत्र मे दो दर्जन से अधिक ऐसे किसान है जो इस तरह की समस्या से दो चार हो रहे है। किसानो ने मांग की है की जहा पर मंडीया चालु है उन्हे पास बनाकर दिये जाये ताकी वै अपनी फसल मंडीयो मे बेच सके जिससे
होने वाले आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।
Tags
dhar-nimad