जिले के धारना में गुरुवार को मचा हड़कंप
गांव वालों को पता चला कि महाराष्ट्र वर्धा से 44 ग्रामीण आए
सूचना मिलते ही प्रशासनिक व स्वास्थ्य अमला हरकत में आ गया। महाराष्ट्र से आने वाले सभी ग्रामीणों (मजदूर) को क्वारंटाइन कर दिया गया है
सिवनी (संतोष जैन) - देर रात ट्रक में पहुंचे ग्रामीण - धारनाकलां में बुधवार देर रात ट्रक में सवार होकर ग्रामीण पहुंचे। जिस ट्रक में ग्रामीण धारना पहुंचे उस ट्रक के बारे में अमले को कोई जानकारी फिलहाल नहीं है। ट्रक में ग्रामीण कहां से और कब बैठे थे, इसकी भी जानकारी नहीं है। हालांकि धारना पहुंचे ग्रामीणों का कहना है कि वह चार दिन पहले महाराष्ट्र के वर्धा से निकले थे। किसी तरह वह पैदल सिवनी तक पहुंचे। यहां से वे एक ट्रक में बैठकर धारनाकला पहुंचे हैं।
मिडिल स्कूल में की व्यवस्था - गुरुवार सुबह महाराष्ट्र से आए इन ग्रामीणों की जानकारी मिलने के बाद बरघाट एसडीएम, तहसीलदार, थाना प्रभारी व बीएमओ धारनाकला अमले के साथ पहुंचे।
रात में बाहर से आए सभी ग्रामीणों को आनन फानन में सूचना देकर गांव के ही मिडिल स्कूल में एकत्रित किया गया। यहां बीएमओ डॉ उषाश्री पांडे व अन्य स्वास्थ्य अमले ने ग्रामीणों की जांच की। इसके बाद सभी को मिडिल स्कूल में क्वारंटाइन कर दिया गया है।
नहीं मिले हैं लक्षण - ग्रामीणों की जांच करने पहुंची बीएमओ डॉ उषाश्री पांडे ने बताया है कि जांच में बाहर से आने वाले किसी भी ग्रामीण में कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर सभी को क्वारंटाइन पर रखा गया है। उन्होंने बताया है कि एक अन्य गांव जनमखारी में भी 11 ग्रामीण पहुंचे थे। उनकी भी जांच घर जाकर की गई है। ये सभी स्वस्थ हैं। सभी को 14 दिनों तक घर में ही रहने की हिदायत दी गई है।
ग्रामीणों में बच्चे भी शामिल - रातों रात महाराष्ट्र से धारनाकला पहुंचे ग्रामीणों में बच्चे भी शामिल हैं। प्रशासन ने इन बच्चों की विशेष देखभाल के निर्देश दिए हैं। क्वारंटाइन के दौरान सभी ग्रामीणों के भोजन व अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को सौंपी गई है। पंचायत के सचिव शेरसिंह ठाकरे ने बताया है कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान तकरीबन 200 ग्रामीण बाहर से आए हैं। इनमें से किसी भी ग्रामीण में कोरोना वायरस के संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। बुधवार रात लौटे ग्रामीणों के नाश्ते व भोजन की व्यवस्था कर दी गई है।
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