धूम धाम से मनाई राम नवमी - बड़े रामजी से लाइव प्रसारण से घर पर ही की रामभक्तों ने आरती
थांदला (कादर शेख) - हिन्दू संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को आदर्श के रूप में स्वीकार किया गया है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार त्रेतायुग में चैत्र माह के शुक्लपक्ष की नवमी तिथि को दोपहर में श्रीराम का जन्म हुआ था। हिंदू कैलेंडर के अनुसार 2 अप्रैल, गुरुवार को भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के साथ ही भगवान हनुमान की भी पूजा की गई। वैश्विक महामारी के चलते लॉक डाउन का पालन करते हुए मन्दिर के चुनिंदा भक्तों के साथ बड़े रामजी मंदिर पर दोपहर 12 बजे मन्दिर के पुजारी रोहित बैरागी द्वारा महा आरती की गई जिसे कल्पना स्टूडियो द्वारा नगर के सभी राम भक्तों के लिये लाइव प्रसारित की गई जिससे सभी रामभक्तों ने अपने अपने घरों से ही भगवान की आरती करते हुए विश्व कल्याण की भावना के साथ कोरोना महामारी से मुक्त बने यह कामना भी की। हिन्दू संस्कृति में श्रीराम को भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना गया हैं। ये बात रामायण के साथ ही लिंग, नारद और ब्रह्मपुराण में भी बताई गई है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। यही कारण है कि इस दिन श्रीराम के साथ-साथ मां दुर्गा की भी पूजा की जाती है।
चैत्र नवरात्र की समाप्ति का दिन स्थानीय देवीगढ़ पर भी स्वयं भू माताजी की आरती की गई
चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन लघु पावागढ़ के रूप में प्रसिद्ध देवीगढ़ पर स्वयं भू से प्रकट माताजी की आरती मन्दिर पुजारी द्वारा की गई। प्रतिवर्ष यहाँ माताजी के नवरात्रि में मेला लगता है लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मन्दिर बन्द रहा लेकिन कुछ एक माताजी के भक्तों का आवागमन चलता रहा।
नौ दिन के चैत्र नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन राम नवमी है, इस पर्व को लोग भगवान राम के जन्म व आद्यशक्ति की पूजा की दोहरी खुशी के रूप में मनाते हैं। इस दिन भक्त रामायण व आद्यशक्ति के विभिन्न रूपों का पाठ भी करते हैं। इस दिन को लेकर ऐसा माना जाता है कि बिना किसी मुहूर्त के सभी प्रकार के मांगलिक कार्य इस दिन संपन्न किए जा सकते हैं व भगवान श्रीराम व आद्यशक्ति सर्व विघ्न विनाशक बन पारिवारिक सुख शांति और समृद्धि प्रदान करते है।
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