खंडवा शहर में मीले 5 ट्रक भरे राशन का मामला | Khandwa shahar main mile 5 truck bhare rashan ka mamla

खंडवा शहर में मीले 5 ट्रक भरे राशन का मामला

आखिर गरीब की थाली पर झपट्टा मारने वालों के खिलाफ भी हमारी खामोशी ..?

खंडवा शहर में मीले 5 ट्रक भरे राशन का मामला

बुरहानपुर। (अमर दिवाने) - दुनिया मानवता के अस्तित्व को बचाने में लगी है। देश के पहिये थमे हुए है। मजदूर के घर खाने को नही है। लोग भोजन बाट रहे है और इस विकट संकट में भी कुछ लोग गरीब की थाली की रोटी और चावल पर झपट्टा मार रहे है। क्या ये खबर आपकी झकझोरती नही..?

सवाल बहुतेरे है। गरीबों को बटने वाला अनाज ट्रांसपोर्टर के घर क्यो गया..? बिना जीपीएस सिस्टम के परिवहन की अनुमति कैसे..? सरकारी अनाज करोड़पति के बंगले तक कैसे..? जिम्मेदार नागरिक आपूर्ति और खाध्य विभाग के अधिकारियों को 2 किलोमीटर का सफर पूरा करने में 4 घंटे क्यो लग गए.? अधिकारी यह तक नही जानते कि ये आपराधिक कृत्य कौन कर रहा है.? उसके साथ 2 घंटे बतियाते है, मगर नाम नही जानते.? 

यह चूक है या मिलीभगत.? नकारापन है या हद दर्जे की बेशर्मी.? विपक्ष में बैठा मान्धाता विधायक न्याय की गुहार लगा रहा है, और सत्ता की मलाई खाने वाले भाजपा के तीनों विधायक खामोश.?? नेताओ के जन्मदिन पर विज्ञापन देने वाला आरोपी कई बार ब्लैकलिस्टेड हो चुका है।फिर भी हर बार किसकी मेंहरबानी से उसे ही इस पुनीत कार्य का ठेका मिलता है। आखिर कैसे, क्या यह जानने की जरूरत हमारे सांसद, विधायक करेंगे..? 

राशन दुकानों पर जाकर औचक निरीक्षण कर फ़ोटो खिंचवाने वाले खण्डवा विधायक क्या अब मुह खोलेंगे.? 

क्या गलती सिर्फ आरोपी परिवहनकर्ता की है.? आपूर्ति निगम हमेशा की तरह क्यो सोता रहा। पीड़िएस की जिम्मेदारी जिन पर है वो कंधे कैसे उचका सकते है.? क्या आवश्यक वस्तु अधिनियम में पुलिस स्वयं अपराध पंजीबद्ध नही कर सकती है.?

कोरोना संकट में चंदा मांग कर रोटी खिलाने वाला प्रशासन कितना विवश है। उसकी नाक के नीचे से गरीब का राशन गयाब हो रहा है। आम जनता घरों में कैद है। दरिंदे सुनी सड़को पर तांडव मचा रहे है। हमारे जनप्रतिनिधियों के मौन आपराधिक है। धिक्कार है ऐसी चरमराई हुई व्यवस्था पर।

साभार मनीष जैन खंडवा

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