बिना कोचिंग के कक्षा में आती है अव्वल
लाख मुसीबतें थी राह में जिन्होंने रास्ता रोका
लेकिन प्रतिभा के हौसलों के बदौलत आगे बढ़ती जा रही है ज्योति, माता-पिता अनपढ़ श्रमिक
उज्जैन (रोशन पंकज) - प्रतिभा और बुद्धिमता किसी की मोहताज नहीं होती है। ये दोनों न तो कोई चुरा सकता है न ही किसी से छीन सकता है, लेकिन अगर ये दोनों किसी के पास है तो वह संसार की कोई भी वस्तु हासिल कर सकता है। प्रतिभावान होने के लिये धन-दौलत, संसाधन, घर और पारिवारिक स्थिति का मजबूत होना कतई जरूरी नहीं है। इसका जीता-जागता उदाहरण है नागदा में रहने वाली प्रतिभाशाली छात्रा ज्योति चौहान।
नागदा के किलकीपुरा में एक तंग गली के दोनों ओर बने हुए कच्चे मकानों में से ही एक मकान में रहती हैं ज्योति। पिता कचरूलाल चौहान और मां प्रेमबाई दोनों श्रमिक हैं। पिता ढाबे पर काम करते हैं और माता ईंट-भट्टे पर मजदूरी करती हैं। माता-पिता दोनों गरीबी के कारण अनपढ़ रह गये, लेकिन उन्होंने तंगहाली का साया कभी बेटी की पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया। उन्होंने दिन-रात एक करके बेटी को शिक्षा ग्रहण करवाई। वहीं दूसरी ओर ज्योति भी अपने माता-पिता की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरी। पढ़ाई के प्रति लगाव की बदौलत ज्योति बिना किसी कोचिंग या सहायता के अपनी कक्षा में हमेशा अव्वल आती है।
ज्योति जैसे अन्य श्रमिकों के बच्चों के हौसलों की उड़ान को नई ऊर्जा दे रही है मध्य प्रदेश शासन की सुपर-5000 योजना। यह योजना मध्य प्रदेश शासन के भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा संचालित की जाती है, जिसमें श्रमिकों के मेधावी और प्रतिभाशाली बच्चों को अच्छी और उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिये प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
सहायक श्रमायुक्त उज्जैन श्रीमती मेघना भट्ट द्वारा जानकारी दी गई कि उक्त योजना के तहत ज्योति के बैंक खाते में 25 हजार रुपये की हितलाभ राशि कार्यालय द्वारा अन्तरित कर दी गई है। श्रीमती मेघना भट्ट ने ज्योति को उज्जवल भविष्य के लिये शुभकामनाएं भी दी हैं।
वर्तमान में ज्योति नागदा के शासकीय कन्या महाविद्यालय के अन्तिम वर्ष की छात्रा हैं। वे राजनीतिशास्त्र का अध्ययन कर रही हैं। ज्योति को पूर्व में भी मेधावी छात्र सम्मान योजना के तहत विकास खण्ड स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हो चुका है। ज्योति ने हायर सेकेंडरी परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपने माता-पिता और विद्यालय का नाम रोशन किया था। महाविद्यालय में भी सभी शिक्षकों को ज्योति पर नाज़ है।
खुद कभी कोचिंग नहीं ली, लेकिन किताबों के खर्च के लिये बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं
ज्योति के दो छोटे भाई भी है। आज तक ज्योति ने कभी भी पढ़ने के लिये कोचिंग का सहारा नहीं लिया, लेकिन वे अपने से छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हैं, ताकि अपने कोर्स की किताबों का खर्च स्वयं वहन कर सके। इसके साथ ही अपने छोटे भाईयों की पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान रखती हैं। ज्योति आगे स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर शासकीय सेवा करना चाहती हैं। शासन की ओर से प्रदाय की गई राशि से ज्योति कम्प्यूटर खरीदेंगी, ताकि पढ़ाई में और सहायता मिल सके। ज्योति कहती हैं कि उनके जैसे अन्य छात्र-छात्राओं के लिये शासन की सुपर-5000 योजना अत्यन्त प्रेरणादायक है।
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