भगवान शिव का मंदिर जहां मिलती है ऋण से मुक्ति | Bhagwan shiv ka mandir jaha milti hai

भगवान शिव का मंदिर जहां मिलती है ऋण से मुक्ति

भगवान शिव का मंदिर जहां मिलती है ऋण से मुक्ति

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - ऐतिहासिक ऋ णमुक्तेश्वर मंदिर जहां पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करने मात्र से लोगों को ऋ ण से मुक्ति मिल जाती है। मंदिर निर्माण को लेकर तरह-तरह की मान्यता है। ऋ ण से मुक्ति मिलने के चलते मंदिर का नाम ऋ णमुक्तेश्वर रखा गया। मां नर्मदा नदी की परिक्रमा करने वाले श्रद्घालुओं की भी परिक्रमा यहां दर्शन किए बिना पूरी नहीं होती। जिला मुख्यालय डिंडौरी से लगभग 15 किलोमीटर दूर कुकर्रामठ गांव में स्थित कल्चुरीकालीन ऐतिहासिक ऋ णमुक्तेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के मौके पर विशेष पूजा अर्चना का दौर चलता है। भगवान शिव के दर्शन कर ऋ ण से मुक्ति पाने के लिए दूर-दूर से श्रद्घालु यहां पहुंचते हैं। पुरातत्व विभाग की मानें तो मंदिर का निर्माण 10वीं 11वीं शताब्दी में तत्कालीन कल्चुरी राजा कोकल्यदेव ने कराया था।

मान्यता के चलते पत्थर कई जगह से टूटे

मान्यता है कि ऐतिहासिक ऋ णणमुक्तेश्वर मंदिर के पत्थर को पीसकर पिलाने से कुत्ते का जहर कम होता है। इसी मान्यता के चलते लंबे समय से मंदिर के पत्थर को तोड़ तोड़कर ले जाया गया, जिससे ऐतिहासिक मंदिर में लगे पत्थर कई जगह टूटे हुए हैं। अब मंदिर की सुरक्षा को लेकर विशेष नजर रखी जाती है। मंदिर के ठीक सामने एक कुत्ते की प्रतिमा भी स्थापित थी। बताया गया कि कई लोग कुत्ते के काटने के बाद जहर कम करने के लिए कुत्ते की प्रतिमा को तोड़कर भी ले जाते थे, जिसके चलते अब उसे अंदर एक कक्ष में रख दिया गया है। मान्यता यह भी है कि वफादार कुत्ते की याद में बंजारे ने मंदिर का निर्माण कराया था।

भगवान शिव का मंदिर जहां मिलती है ऋण से मुक्ति

साहूकार ने कुत्ते की वफादारी देख कर दिया था मुक्त

जनश्रुति के अनुसार मंदिर का अस्तित्व एक कुत्ता और बंजारे से जुड़ा होना भी बताया जा रहा है। मान्यता है कि बंजारे के पास एक वफादार कुत्ता था। बंजारे के पास पैसे की कमी हुई। पैसे की पूर्ति के लिए बंजारे ने एक साहूकार को अपना कुत्ता गिरवी रखकर कुछ पैसे ले लिया और पैसे कमाने बाहर चला गया। समय गुजरने के साथ ही साहूकार के घर चोरी हो गई। चोरों ने साहूकार के घर से चुराए हुए कीमती सामानों को तालाब के अंदर छिपा दिया। बताया गया कि यह सब साहूकार के पास गिरवी रखा धन था। वफादार कुत्ता साहूकार के यहां हुई चोरी को देखता रहा। सुबह साहूकार की नींद खुलते ही धोती पकड़कर कुत्ता उसी तालाब में ले गया, जहां साहूकार के बेशकीमती चोरी किए गए सामान तालाब छिपाए गए थे।

वफादार कुत्ते की याद में मंदिर बनवाने की मान्यता

मान्यता यह है कि चोरी गया सामान वापस मिलने से साहूकार बहुत खुश हुआ और कुत्ते को ऋ ण से मुक्त करते हुए वापस अपने मालिक के पास जाने को कहा। कुत्ते के गले में एक संदेश लिखकर भी साहूकार ने बांध दिया था। बताया गया कि कुत्ता जब वापस अपने मालिक बंजारे के पास जा रहा था, तभी बंजारा भी अपने वफादार कुत्ते को साहूकार के पास से लेने आ रहा था। रास्ते में कुत्ते को देखकर बंजारे को क्रोध आ गया, उसने सोचा कि साहूकार को बिना बताए कुत्ता वापस आ रहा है। क्रोध में आकर बंजारे ने अपने फरसे से कुत्ते का गला काट दिया और कुत्ते की तुरंत मौत हो गई। बाद में बंजारे की नजर कुत्ते के गले में बांधी साहूकार की चिट्ठी पर पड़ी। बंजारे को संदेश पढ़कर बहुत दुख हुआ और पश्चाताप करने लगा। यह भी कहा गया कि बंजारा ने कुत्ते की याद में मंदिर का निर्माण करवाया था।

अपेक्षा का शिकार है पर्यटन स्थल

कुकर्रामठ में स्थित ऐतिहासिक ऋ णमुक्तेश्वर मंदिर पर्यटन स्थल उपेक्षा का शिकार है। मंदिर के विकास, सजावट, स्वच्छता, मंदिर तक पहुंच मार्ग, सांकेतिक बोर्ड सहित अन्य व्यवस्था अब तक नहीं की गई। बताया गया कि पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में तो जरूर लिया है, लेकिन इसकी देखरेख पर कोई विशेष पहल नहीं हो रही है, जिससे ऐतिहासिक मंदिर बेरंग नजर आता है। सफाई, सुरक्षा व्यवस्था आदि के नाम पर पदस्थ कर्मचारियों द्वारा मनमानी की जाती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post