दो दिवसीय हलमा के दौरान हाथीपावा पहाडी पर बनायेगे 40 हजार कंटूर-ट्रेंचेस
झाबुआ (अली असगर बोहरा) - परमार्थ की परंपरा के तहत प्यासी धरती मां के लिये परम्परागत रूप से हलमा 2020 को लेकर रविवार को शिवगंगा प्रमुख पद्मश्री महेश शर्मा द्वारा पैलेस गार्डन में प्रेस वार्ता आयोजित करके आगामी 29 फरवरी एवं 1 मार्च को होने वाले हलमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा जनसहभागिता के बारे में अपील की । पद्मश्री महेश शर्मा ने कहा कि धरती का तापमान 1 डिग्री कम करने तथा विश्वव्यापी ग्लोबल वार्मिग को देखते हुए विश्व के सभी देश पर्यावरण को संतुलित करने के लियें करोडो की राशि व्यय कर रहे है। उन्होने बताया कि शिवगंगा द्वारा आयोजित होने वाले हलमा के प्रभावी कार्यक्रम से पर्यावरण संरक्षण में हम सभी लाभार्थी है ।
श्री शर्मा ने आगे कहा कि झाबुआ जिले के जनजाती परंम्परा के तहत यहां के गा्रमीण जन एवं सभी सहभागी गेती, फावडा, आदि के साथ कण्टूर निर्माण के अलावा वृक्ष लगाने, तालाब बनाने आदि के पर्यावरण संरक्षण के कार्य करते है । श्री शर्मा ने कहा कि 29 फरवरी से दशहरा मेैदान पर गांव गांव से हलमा करने वाले वनवासी माता बहिने एकत्रित होगें करीब 20 हजार से अधिक की संख्या में लोग हलवा में श्रमदान के लिये एकत्रित होगें 29 फरवरी को सायंकाल 4 बजे नगर में प्रवेश करने से लेकर पुनः कार्यक्रम स्थल आने तक गैती सम्मान यात्रा निकाली जावेगी । गैती फावडा, तगारी पर्यावरण सरंक्षण और संवर्धन के मुख्य आधार है इसलिये यह गैती सम्मान यात्रा ठीक वेसे ही निकलेगी जिस प्रकार सैनिक कांधे पर हथियार लेकर गर्व से चलता है, और इस गैती सम्मान यात्रा में किसान भाई नगर का भ्रमण करेगें । उन्होने कहा कि ग्लरोबल वार्मिग आज हम सभी का चिंता का सबब बन चुका है ।सामथ्र्य की तुलना में यह समस्या बडी नही है । विश्व के 7 हजार करोड व्यक्ति जानते हुए भी सामथ्र्य होने पर भी लगा नही पारहे है। इससे देश में चिंता का विषय है किन्तु झाबुआ के वनवासी किसान बरसों पूरानी हलमा परम्परा इस क्षेत्र में कारगार सिद्ध होरही है। श्री शर्मा ने हाथीपावा की पहाडी पर प्रतिकात्मक रूप सें होने वाले हलमा कार्यक्रम मे सभी लोगों को पर्यावरण सरक्षण, संवर्धन के लिये तथा जल रोकनेके इस कार्यक्रम में शारीरिक श्रम के अलावा वृक्षा रोपण करने के लिये भी आव्हान किया तथा 29 फरवरी को महत्वपूर्ण आयोजन में सहभागी होने तथा गैती सम्मान यात्रा के दौरान नगरवासियों की ओर से स्वागतअभिनंदन करके इनके मनोबल को बढाने की बात भी भी कहीं ।
इस अवसर पर शिवगंगा के कार्यकर्ता राजाराम कटारा ने बताया कि आयोजन के लिये पिछले एक माह से 2 हजार से अधिक शिवगंगा कार्यकर्ता गांव गांव जाकर परिवारों को हलमा का निमंत्रण दे रहे है । अब तक 500 से अधिक गा्रमों में लगभग 70 हजार परिवारों निंमंत्रण दिया जा चुका है । उन्होने बताया कि 29 फरवरी को शुरू हो रहा यह हलमा हाथीपावा के बाद गांव गांव में भी होता है जिसमे लोग तालाबों का निर्माण करते है, ज्ञातव्य है कि पिछले 10 सालों से झाबुआ में चल रहे ’ जल आन्दोलन’ से अब से 65 बडे तालाब बनाये जाचुके है जिनकी कुल क्षमता 400 करोड लीटर की है । इसके अलावा हलमा के माध्यम से 51 हजार पौधे भी लगाये जाचुके है । श्री कटारा ने बताया कि परमार्थ को लेकर वनांचन में हलमा एक सौगात बन चुका है और इसका अधिक से अधिक पुनर्जागरण हो तथा जल,जंगल,जमीन की जानकारी,उनके सरंक्षण तथा पर्यावरणसरंक्षण के लिये जनभागीदारी बहुत ही जरूरी है । उन्होने बताया कि 2 हजार प्रशिखत कार्यकर्ताओं द्वारा 500 गांवों में 70 हजार परिवारों में घरघर जाकर जल संवर्धनके लिये प्रेरित करेगें ।इन गांवों में 20 हजार से ज्यादागा्रमवासी तथा देशभर के लोग हलमा में शामिल होकर हाथीपावा पहाडी पर आयोजित हो रहे श्रमदान में सहभागी होने की अपील की । हाथीपावा पहाडी परं 40 हजार कंटूर ट्रेंचेस का हलमा के माध्यम से निर्माण किया जावेगा ।उन्होने कहा कि गा्रम गा्रम सेवनवासी भाई 29 फरवरी को ’’जाग जो म्हारा भाईयों कणी निद्रा में सोया हो’’ इस आयोजन में 150 से अधिक संतगणों के अलावा देश के बडे बडे शिक्षा संस्थानों, से लोगों की सहभागीता होगी ।
आईआईटी रूडकी से स्नातक कर पूर्णकालिक कार्यकर्ता शिवगंगा के साथ काम कर रहेनितिन धाकड ने बताया कि70 परिवारों तक पहूंचने की प्रग्रिया औए एक साथ 20 हजार लोगों के लिये खाने पीने,रहने की व्यवसा अपने आप में अध्ययन का विषय हैउन्होने बताया किइन बातों को सीखने समझाने के लिये आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, रूडकी और एनआईडी गांधीनगर सहित देशभर के विभिन्न संस्थानों से 150 से अधिक छात्र हलमा के लिये झाबुआ आ रहे है । इसके अलावा 100 के लगभग अलग अलग क्षेत्रों के पेशवर अनुभवी जन भी हलमा में आरहे है ।
शिवगंगा के वरिष्ठ कार्यकर्ता रामसिंह मेडा नेकहा कि हलमा मानव मात्र के लिये कल्याणकारी एवं हितकारी है । पूरे देश में झाबुआ के ’’ हलमा’’ की प्रसंशा एवं सराहना हो रही है ।29 फरवरी को गैती सम्मान यात्रा में नगर के नागरिकों से भी सहभागी होने का आव्हान करते हुएउन्होने कहा कि तालाब का निर्माण होने से मानव जाकि अलावा पशु पक्षी के लिये भी पानी का पंरबध होता है ।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए नीरजसिंह राठौर ने कहा कि वर्ष 2010 से शिवगंगा द्वारा हलमा का आयोजन किया जारहा है जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आये है।उन्होने हलमा के तहत 29 फरवरी को निकलने वाली गैती सम्मान यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि नगर की परम्परा के अनुसार नगर के सभी समाजों, वर्गो के अलावा सभी सामाजिक एवं घार्मिक संस्थाओं की ओर से गेती यात्रा का पुष्पवर्षा करके हर जगह स्वागत एवं अभिनंदन किया जावेगा । उन्होने कहा कि शिवगंगा के इस अभिनव आयोजन में नगर की जनता 29 फरवरी एवं 1 मार्च को इसका गौरवशाली तरिके से अभिनंदन स्वागत करके मनोबल बढाने में अपनी भूमिका का निर्वाह करेगी । अन्त में आभार प्रदर्शन शिवगंगा के महेश शाह ने व्यक्त किया ।
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