जीवन में कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जो जीने की राह दिखाते हैं - एनएच 12 क्रियेटिव वूमेन्स क्लब | Jivan main kuch ese pal bhi hote hai

जीवन में कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जो जीने की राह दिखाते हैं - एनएच 12 क्रियेटिव वूमेन्स क्लब

जीवन में कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जो जीने की राह दिखाते हैं- एनएच 12 क्रियेटिव वूमेन्स क्लब

अनूपपुर, (अरविन्द द्विवेदी) - एनएच 12 क्रियेटिव वूमेन्स क्लब कि बहिनों ने कल्याण वृद्धाश्रम सीतापुर, अनूपपुर में बिताए सकून के कुछ पल और सभी वृद्धजनों को अपनेपन का कराया अहसास। उनका कहना था कि जीवन में कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जो जीने की राह दिखाते हैं। कुछ ऐसे ही पल हमने बिताये उन माता-पिता के साथ जो वृद्धाश्रम मे निवासरत हैं। कुछ क्षण ही सही वो खुश तो हुए, उन सभी के चेहरे की मुस्कुराहट, उनके आंखों के आंसू बता रहे थे कि वो कितने खुश हैं। साथ ही हम सभी बहिनों को ढेरों आशीर्वाद दिया। हमारे द्वारा उन सभी माता-पिता के लिए कपड़ें, फल, मिठाई, बिस्कुट और ढेरों प्यार लेकर गये थे। इस मौके पर श्री मति सुजाता चक्रवर्ती, पूनम जैन, बसंती गुप्ता, वन्दना खरे व वृद्धाश्रम के कर्मचारी भी उपस्थित थे।

इस बड़े ही मार्मिक विषय पर एनएच 12 क्रियेटिव वूमेन्स क्लब कि बहन वन्दना खरे जी का कहना था कि आखिर वृद्धाश्रम बनाये ही क्यों जाते हैं.? हकीकत में वृद्धाश्रम का बनना उस समाज के मुंह पर तमाचा है जो इंसानियत और संस्कारों की जिम्मेदारी लेता है। ‘औल्ड एज होम्स’ में रहने वाले बुजुर्गों का भी परिवार होता है। लोग भले ही बेटों को इस स्थिति के लिये दोष दें, लेकिन हकीकत में बुजुर्गों की इस बेकदरी के लिये वो बेटियां भी कम दोषी नहीं जो उनके बेटों की हमसफर होती हैं।

दुनियाँ की दौड़ में आगे निकलने की होड़ लगा रहे युवा पता नहीं क्यूँ इतने पत्थरदिल हो जाते हैं कि वे उन्हें ही भूल जाते हैं जिन्होने उसे दो कदम चलने के काबिल बनाया था।

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