आदिनाथ भगवान निर्वाण उत्सव पर मोतीचूर लड्डू चढ़ाया गया | Adinath bhagwan nirvan utsav pr motichur laddu chadaya gaya

आदिनाथ भगवान निर्वाण उत्सव पर मोतीचूर लड्डू चढ़ाया गया

आदिनाथ भगवान निर्वाण उत्सव पर मोतीचूर लड्डू चढ़ाया गया

झकनावदा (राकेश लछेटा) - समन्वय मिशन के प्रेरक, सर्वधर्म दिवाकर, क्रांतिकारी, राष्ट्रसंत आचार्य प्रवर डॉ श्री दिव्यानंद श्री सुरिश्वर जी महाराज सा (निराले बाबा) के पावन सानिध्य में भगवान आदिनाथ निर्वाण उत्सव के उपलक्ष में केसरिया नाथ मंदिर में श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ का परायण किया गया। जिसमें समस्त समाज जनों ने बढ़ चढ़कर सहभागिता निभाई।  आदिनाथ भगवान निर्वाण उत्सव पर मोतीचूर लड्डू चढ़ाने का लाभ निर्मल कुमार मांडोत, झमक लाल मांडोत, कन्हैयालाल मंडोत, परिवार ने लिया। कार्यक्रम  के मुख्य अतिथि श्री संजय गुगलिया निजी सचिव गृह मंत्रालय थे। जिनका सम्मान सकल जैन  संघ की ओर से किया गया । 

आदिनाथ भगवान निर्वाण उत्सव पर मोतीचूर लड्डू चढ़ाया गया

आचार्य प्रवर ने अपने प्रवचन में कहा अपने जीवन को परमात्मा के भरोसे छोड़ दो छल कपट धोखा मनुष्य को मिटा देता है छल कपट से परहेज करो परमात्मा से प्रेम करो परमात्मा के बताए मार्ग पर चलकर जीवन का कल्याण करोइस संसार में आस्तिक और नास्तिक दो प्रकार के लोग रहते हैं जो कहते हैं हम नास्तिक है किसी भी ईश्वरीय सत्ता को नहीं मानते हम उनसे पूछते हैं कि क्या तुम स्त्री, बच्चे, बहन, भाई, माता, पिता को प्यार नहीं करते अगर करते हो तो तुम नास्तिक नहीं हो सकते जो व्यक्ति किसी से प्रेम करता है प्यार करता है नास्तिक नहीं हो सकता क्योंकि शरीर में ही परमात्मा का वास रहता है। नास्तिक व्यक्ति वह है जिसके शरीर में प्यार की भावना ना हो ऐसा व्यक्ति संसार में मुश्किल से मिलता है। आस्तिक व्यक्ति में प्यार श्रद्धा और समर्पण कूट कूट कर भरा होता है जो व्यक्ति पत्थर को मूर्ति ना मानकर साक्षात देवता समझ कर पूजा-अर्चना करें तो उसी मूर्ति में साक्षात देवता भी प्रकट होते हैं।

माता श्री पद्मावती देवी जी की संध्या आरती का लाभ कनक मल मंडोत परिवार द्वारा लिया गया।

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