मात्र 15 बीघा जमीन में ज्यादा लाभ कमा रहे तराना के किसान हरिशंकर | Matr 15 bhiga jameen main jyada laabh kma rhe tarana ke kisan

मात्र 15 बीघा जमीन में ज्यादा लाभ कमा रहे तराना के किसान हरिशंकर 

परम्परागत फसल की जगह जामफल और नींबू लगाये

हो रहा 25 गुना ज्यादा फायदा
मात्र 15 बीघा जमीन में ज्यादा लाभ कमा रहे तराना के किसान हरिशंकर

सफलता की कहानी

उज्जैन (रोशन पंकज) - यह आम धारणा है कि खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिये किसान के पास अधिक से अधिक कृषि भूमि होनी चाहिये। जितने किसान प्रगति करना चाहते हैं, उनके पास औसत 80 से 90 बीघा जमीन तो होना ही चाहिये, ताकि वे उस पर विभिन्न प्रयोग कर सकें। इस धारणा को पूरी तरह गलत साबित किया है तराना तहसील के गांव खांडाखेड़ी के 59 वर्षीय किसान हरिशंकर देवड़ा ने। इनके पास मात्र 15 बीघा जमीन है, लेकिन परम्परागत खेती के स्थान पर कुछ नया और अलग करने के उनके जज्‍़बे को जमीन की कमी भी दबा न सकी।
श्री देवड़ा हमेशा से खेती में कुछ लीक से हटकर करना चाहते थे। उन्होंने परम्परागत फसल जैसे गेहूं और चने के स्थान पर अपने खेत में चार बीघा में जामफल और पांच बीघा में नींबू लगाये हैं। शेष दो बीघा में लहसुन, एक बीघा में दाल और बाकी में पशुओं के लिये चरी बोई है। कम संसाधनों से भी अधिक से अधिक मुनाफा कैसे कमाया जाये, यह अगर सीखना हो तो किसान श्री हरिशंकर देवड़ा और उनके परिवार से सीखना चाहिये।
मात्र 15 बीघा जमीन में ज्यादा लाभ कमा रहे तराना के किसान हरिशंकर

श्री देवड़ा के परिवार में बेटा राकेश, बहू संगीता और पोते चेतन और चन्दन देवड़ा हैं। घर में लगभग 16 पशुधन भी है। पशुओं की देखभाल उनकी बहू करती हैं। बेटे राकेश खेतीबाड़ी में सहयोग करते हैं। नवीन उद्यानिकी फसलें लगाने से श्री देवड़ा को परम्परागत फसल से 25 गुना ज्यादा लाभ मिल रहा है। इन पौधों को लगाने के बाद शुरू के तीन-चार वर्ष तक उन्हें देखभाल करना पड़ी, लेकिन अब उन्हें इससे सिर्फ फायदे ही फायदे मिल रहे हैं। इसमें नुकसान का प्रतिशत न के बराबर है।
श्री देवड़ा पूरी फसल में जैविक खाद का उपयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और सलाह के अनुसार उन्होंने जामफल और नींबू की फसल लगाई है। शुरू में उन्हें आसपास के कई किसानों ने नया प्रयोग करने से मना किया था, लेकिन अब अच्छे परिणामों को देखने के बाद दूसरे किसान भी श्री देवड़ा से प्रेरणा लेकर अपनी फसलों में नये प्रयोग को जगह दे रहे हैं। उद्यानिकी विभाग द्वारा जामफल और नींबू के पौधे लगाने के लिये किसान श्री देवड़ा को एक हेक्टेयर के हिसाब से 60 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदाय की गई है। साथ ही जामफल और नींबू के पौधे भी पूर्णत: नि:शुल्क उपलब्ध कराये गये हैं।
मात्र 15 बीघा जमीन में ज्यादा लाभ कमा रहे तराना के किसान हरिशंकर

श्री देवड़ा बताते हैं कि वे पिछले कई सालों से परम्परागत खेती कर रहे थे, लेकिन फसल बदलने के बाद इतना फायदा उन्हें पहली बार हुआ है। तकरीबन चार बीघा में लगाये गये जामफल के पौधों से 300 क्विंटल जामफल मिलते हैं। ये बिक्री के लिये उज्जैन शहर, देवास और शाजापुर तक जाते हैं। जामफल और नींबू की बिक्री से श्री देवड़ा को 10 लाख रुपये का लाभ हर मौसम में प्राप्त हो रहा है। श्री देवड़ा कृषि मित्र भी हैं तथा आसपास के किसानों को समय-समय पर विभाग द्वारा जारी सलाह से भी अवगत कराते रहते हैं। उन्हें कृषि और उद्यानिकी विभाग की तरफ से कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। साथ ही कृषि विभाग की आत्मा की तरफ से उन्हें 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि नवीन और अनुकरणीय पहल करने के लिये दी गई है।
हरिशंकर ने अपने खेत में जामफल की सफेद इलाईची और लखनवी तथा नींबू की कागदी नस्ल लगाई है। नींबू बेचने के साथ श्री देवड़ा की बहू नींबू का अचार तथा उन्नत बीज की मार्केटिंग आसपास के गांवों में करती हैं। पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाये गये नींबू के घर में बने अचार की मांग आसपास के गांव में लगातार बढ़ती जा रही है।
श्री देवड़ा ने कभी अपने बेटे और बहू में फर्क नहीं किया। उनके परिवार में बहू द्वारा कृषि और पशुपालन में समय-समय पर दिये गये सुझावों को न सिर्फ माना जाता है, बल्कि सुझावों की प्रशंसा भी की जाती है। श्री देवड़ा की बहू गृहकार्य में तो दक्ष है ही साथ में कृषि और पशु उत्पादों के संवर्धन और व्यवसाय में भी कंधे से कंधा मिलाकर उनका हाथ बंटाती हैं।
खेती में हो रहे लाभ ने हरिशंकर और उनके परिवार के जिन्दगी में भी जामफल-सी मिठास घोल दी है। उनके परिवार की नई पीढ़ी के अरमानों को भी पंख लगा दिये हैं। हरिशंकर अपने पोतों को खेती के साथ-साथ अच्छी और उच्च शिक्षा दिलवाना चाहते हैं। ये सब खेती में नये प्रयोग करने के कारण ही संभव हो सका है। श्री देवड़ा उन सभी किसानों के लिये प्रेरणास्त्रोत हैं, जो सीमित संसाधन से भी लाभ कमाना जानते हैं।

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