जब सभी जीवों के प्रति करुणा के भाव जगते है तभी जीव संयम लेता है - साध्वी निखिलशीलाजी म.सा.
यह सम्मान मेरा नही संयमी भावों का है - मुमुक्षु बहन आयुषी गाँधी
थांदला (कादर शेख) - जय जयकर दीक्षार्थी की जय जयकार, मुमुक्षु बहना की जय जयकार के नारों के साथ धर्मधरा थान्दला में मुमुक्षु बहन आयुषी गाँधी का भव्य स्वागत किया गया। स्थानीय नयापुरा पर श्रीमती राजल बहन गादिया के निवास पर उनके द्वारा आतिथ्य सत्कार के साथ साथ स्थानीय श्रावक - श्राविकाओं के नवकारसी की व्यवस्था रखी गई। जैन समाज के सभी सदस्यों ने यहाँ पहुँचकर नवकारसी का लाभ लिया व उसके बाद जयकार यात्रा के साथ सभी जवाहर मार्ग होते हुए चातुर्मास काल मे विराजित परम् विदुषी महासती पूज्या श्रीधैर्यप्रभाजी, पूज्या श्रीनिखिलशीलाजी, पूज्या श्रीदिव्यशीलाजी, पूज्या श्रीप्रियशीलाजी व पूज्या श्रीदिप्तीश्रीजी म.सा. के दर्शन वन्दन स्थानीय पौषध भवन पहुँचे।
महासतियाजी ने धर्मसभा में दिए प्रवचन
विदुषी महासती पूज्या श्रीधैर्यप्रभाजी महासती ने संयमी बहना को मंगल आशिर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि परिवार की ममता का त्याग, विषय कषाय को छोड़कर आयुषी बहना संयम जीवन मे प्रवेश कर रही है। यह मार्ग सदा से ही आत्म कल्याण का मार्ग रहा हुआ है। बहन भी अपने आत्मबल को मजबूत करते हुए जिनशासन की प्रभावना करते हुए कुल गौरव को बड़ाये। उपस्थित जन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने संसार की असारता समझा कर संयम के महत्व को बताया। इस अवसर पर धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए महासती निखिलशीलाजी म.सा. ने कहा की जब सभी जीवों के प्रति करुणा के भाव आते है तभी जीव को वैराग्य आता है। धर्मदास गण के बड़े मेनकुंवरजी म.सा. के पुण्य स्मरण दिवस होने पर उनके संयमी जीवन को बताते हुए उन्होंने जीवों के प्रति करुणा के दृष्टांत को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जब जीव को घर संसार आश्रव का द्वार लगता है उसको सम्यग समझ आती है तभी वह संयम में प्रविष्ट होता है। उन्होंने मुमुक्षु आत्मा को मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि जिस प्रकार घर के काम करते समय लकड़ी में जीवों को देख बड़े मेनकुंवरजी म.सा. ने महज आठ वर्ष की वय में संयम धारण कर जिनशाशन को दीपाया वैसे ही आयुषी बहन भी अपने आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।
आयुषी बहन का किया सम्मान
पूज्य श्रीधर्मदास गणवीर के पाट परम्परा के जैनाचार्य परम् पूज्य श्रीउमेशमुनिजी म.सा. के प्रथम शिष्य प्रवर्तक श्रीजीनेन्द्रमुनिजी म.सा. एवं अन्य सन्त सतियाजी म.सा. के पावन सानिध्य में आगामी 18 दिसम्बर को मुमुक्षु बहन आयुषी गाँधी संयम आंगिकार करने जा रही है। जिसको लेकर जैन समाज खासा उत्साहित है व उनके संयमी जीवन की अनुमोदनार्थ उनका स्वागत सम्मान कर रहा है। पुण्य भूमि धर्म धरा थान्दला में स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के नगीनलाल शाहजी, प्रकाशचन्द्र घोड़ावत, पूनमचंद गादिया, महेश व्होरा, भरत भंसाली आदि पूर्वाध्यक्ष व वर्तमान अध्यक्ष जितेंद्र घोड़ावत द्वारा मुमुक्षु बहन आयुषी गाँधी का शाल-माला व प्रशस्ति पत्र द्वारा स्वागत सम्मान किया गया। इसी श्रंखला में आल इण्डिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन (आईजा) के प्रदेशाध्यक्ष पवन नाहर, कमलेश तलेरा, कमलेश कुवाड़, मिलिंद कोठारी, जितेंद्र सी घोड़ावत आदि जैन पत्रकारों ने भी सम्मान किया। तेरापंथ महासभा की श्राविकाओं द्वारा, जैन सोश्यल ग्रुप के सदस्य द्वारा, आचार्य श्रीउमेशमुनिजी "अणु" जैन पारमार्थिक ट्रस्ट के द्वारा भी आयुषी बहन का सम्मान किया गया। वही अन्य समाजजनों ने भी आयुषी बहन के संयमी जीवन की मंगल भावना व्यक्त की। इस अवसर पर मुमुक्षु बहन के परिवार बुआ श्रीमती कुसुम मुरार का सम्मान धर्मलता महिला मंडल ने व भाई अंकित गाँधी का सम्मान ललित जैन नवयुवक मण्डल अध्यक्ष कपिल पीचा, सचिव जितेंद्र सी घोड़ावत व कोषाध्यक्ष चर्चिल गंग ने किया। सभा का संचालन संघ मंत्री प्रदीप गादिया ने किया।
धर्मसभा में मुमुक्षु आयुषी बहन ने अपने भाव बताये
अपने सम्मान व संयम यात्रा प्रारम्भ करने से पूर्व जैन समाज के आग्रह पर मंगल आशीर्वाद लेने आई मुमुक्षु बहन आयुषी गाँधी ने कहा कि यह जो सम्मान संघ समाज ने दिया है यह उनका नही अपितु संयमी भावों का है। उन्होंने कहा संसार सागर से पार जाने व शाश्वत सुख दिलाने वाले इस प्रशस्त मार्ग संयम, शील व वैराग्य भाव का अभिनन्दन पहले भी होता था, आज भी होता है और आगे भी होता रहेगा अपनी विनम्र वाणी से उन्होंने उपस्थित सकल जैन संघ से मंगल आशीर्वाद प्राप्त करते हुए जैन भगवती दीक्षा के लिये पेटलावद आमंत्रित किया।
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