गरीब की झोपड़ी मैं भी बस्ती है देश सेवा, रूपाली की इस उपलब्धी पर परिवार फुले नहीं समा रहा | Garib ki jhopdi main bhi basti hai desh seva

गरीब की झोपड़ी मैं भी बस्ती है देश सेवा, रूपाली की इस उपलब्धी पर परिवार फुले नहीं समा रहा

गरीब की झोपड़ी मैं भी बस्ती है देश सेवा, रूपाली की इस उपलब्धी पर परिवार फुले नहीं समा रहा

पेटलावद (मनीष कुमट) - झाबुआ जैसे अंचल में भी प्रतिभावों की कमी नहीं है, आवश्यकता है तो सिर्फ उन्हें निखारने की। एैसा हीं झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील के ग्राम नाहरपुरा की होनहार बालिका ने कर दिखाया। पुरा परिवार जहां एक और मेहनत मजदुरी व खेती कार्य कर अपना व परिवार का पालन पोषण कर रहे है। एैसे में नाहरपुरा की रहने वाली कुं. रूपाली पिता मंागुजी भूरिया उम्र 28 वर्ष ने अपने स्वयं के बल बुते के साथ-साथ कठोर मेहनत और लगन से यह कारनामा कर दिखाया। पहले एक वर्ष रूपाली हिमाचल प्रदेश में ट्रेनिंग पर रहीं और 1 वर्ष से नेपाल की बार्डर पर तेनात है। आदिवासी अंचल की यह बेटी आज भारत के मान सम्मान की रक्षा करते हुए नेपाल-भारत सीमा पर एसएसबी फोर्स में पुरे जज्बातों के साथ तेनात है। जहां एक और रूपाली की इस उपलब्धी पर परिवार फुले नहीं समा रहा है वहीं दुसरी और झाबुआ जैसा आदिवासी जिले में इस बेटी ने जिले के साथ प्रदेश का नाम भी गोरवांनित किया है। रूपाली ने कक्षा 11वी तक की शिक्षा पेटलावद में प्राप्त की और बाकि की पढ़ाई रतलाम में पुरी करने के बाद देश की सेवा करने की ठानी, और अपनी कड़ी मेहनत के बाद वह इस मुकाम पर पहुंची। सुरत में करते है माता-पिता मजदुरी……..मजदुर परिवार में जन्मी इस बालिका के पिता मांगुजी एवं माता सोमलीबाई जो कि गुजरात राज्य के सुरत में एक निजी स्कुल में कार्यरत है, जहां मेहनत के साथ-साथ अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए पैसा जुटाया। परिवार मंे दो भाई जो कि खेती कार्य कर अपना जीवन यापन कर रहे है तो एक बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। रूपाली के माता पिता चर्चा की गई तो उन्होने बताया कि हमारी बेटी पर हमें गर्व है, जिसने सबसे अलग सोच रखी और देश सेवा के लिए एसएसबी में जाने का फेसला लिया। आज हमें हमारी बेटी पर गर्व महसुस हो रहा है। उल्लेखनिय है कि आदिवासी अंचल में पुरानी रूढ़वादी पंरपरा आज भी जारी है जहां बच्चीयों को कम हीं पढ़ाया जाता है और घरेलु काम काज में धकेल दिया जाता है या फिर कम उम्र में हीं उनकी शादिया कर दी जाती है।

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