अपने शरीर पर जवारे धारण कर, जगाई दिव्य मनोकामना कलश जोत | Apne sharir or jaware dharan kr jagai divy

अपने शरीर पर जवारे धारण कर, जगाई दिव्य मनोकामना कलश जोत

अपने शरीर पर जवारे धारण कर, जगाई दिव्य मनोकामना कलश जोत

ग्राम पटनिया में भक्तों का लगा तांता,आस्था के इस केंद्र पर प्रतिदिन दर्शन हेतु भक्त गण हो रहे एकत्रित


छिदवाडा/अमरवाड़ा - जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूर स्थित ग्राम पंचायत पटनिया में भक्त श्रीकांत वेलवंशी पिता पूरनलाल वेल वंशी उम्र लगभग 45 वर्ष निवासी पटनिया को अचानक मातारानी सपने में आई और उन्हें अपने शरीर पर जवारे धारण कर जोत जगाने के लिए प्रेरित किया।बार बार सपने में आकर घर में जवारे बाड़ी लगाने और जोत जगाने के लिए मां दुर्गा इनके सपने में आकर इन्हे जाग्रत करती रही। जिसे पूरा करने हेतू नवरात्र के इस पावन अवसर पर लगभग 8 दिनों से लगातार बगैर कुछ खाए पीए भक्त श्रीकांत अपने शरीर पर जवारे बोकर बाड़ी लगाकर मातारानी का जगराता अपने निवास पर कर रहे है।एवं कुछ भी अन्न जल ग्रहण नहीं कर रहे है 10 दिनों तक भाव भक्ति के साथ भजन जस आदि के कार्यक्रम यहां लोगो के द्वारा किए जा रहे है।एवं मां जगदम्बे की सेवा इनके ओर इनके पूरे परिवार के द्वारा की जा रही है वही ग्राम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से सैंकड़ों की संख्या में भक्तों की भारी भीड़ इन्हे देखने हेतु पहुंच रहे है लोग बड़े ही आस्था के साथ यहां का भक्तिमय मनोरम दृश्य को देख मंत्रमुग्ध हो रहे है।परिवार वालो ने बताया कि 6 माह से श्रीकांत ने कुछ भी अन्न ग्रहण नहीं किए है अब वह सिर्फ फल का सेवन करते है किन्तु अभी नवरात्र पर कुछ भी नहीं लेते है वहीं इनका परिवार का पालन पोषण भी इन्हीं के हाथो में है पे से से वह गरीब मजदूर किसान है।खेती किसानी के माध्यम से अपना जीवनयापन चलाते है सिंगोड़ी क्षेत्र में मा के भक्तों का यह स्वरूप काफी प्रसिद्ध व चर्चा का विषय बना हुआ है कि अपने शरीर पर जवारे धारण कर कलश की स्थापना श्री वेलवंशी ने की जो की एक अलग आस्था प्रकट करती है।

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