सरकार आपका द्वार खटखटा रही है - कलेक्टर श्री डाड | Sarkar apka dwar khatkhata rhi hai

सरकार आपका द्वार खटखटा रही है - कलेक्टर श्री डाड

सरकार आपका द्वार खटखटा रही है - कलेक्टर श्री डाड

बड़वाह जनपद के ग्राम कानापुर में आयोजित किया शिविर

खरगोन (हर्ष गुप्ता) - मप्र शासन की महत्वपूर्ण शिकायत निवारण योजना आपकी सरकार आपके द्वार के तहत शनिवार को बड़वाह जनपद पंचायत के ग्राम कानापुर में आयोजित किया गया। इस दौरान कलेक्टर श्री गोपालचंद्र डाड ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए योजना के संबंध में शासन के स्पष्ट निर्देशों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिविर में हर संभव समस्या का निराकरण 24 घंटे में करने के प्रयास किए जाएंगे। यदि समस्या ऐसी है, जो 24 घंटे में नही हो सकती है, तो ऐसी समस्या का निराकरण एक सप्ताह के भीतर किया जाए। यदि समस्या निराकरण योग्य नही है, तो आवेदक को बताया जाए कि किस कारण से आपकी समस्या या मांग पूरी नहीं की गई। शिविर में आने वाले सभी आवेदनों को न तो अस्वीकार किया जाता है और नहीं सभी को स्वीकार किया जाता है। शिविर में प्राप्त होने वाले सभ्ीा आवेदनों को पहले विभाग के संबंधित अधिकारी को भेजा जाता है, उस पर कार्यवाही संबंधित विभाग द्वारा करने के मैं स्वयं विभाग के जवाब को देखता और परखता हू। उसके पश्चात ही निराकृत या अनिराकृत करता हू। पात्रता योग्य और जायज मांग या समस्या का निराकरण किया जाता है। अब तक आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर जिला और अनुभाग स्तर पर समस्याओं के लेकर आते रहे है, लेकिन अब पूरा प्रशासन आपके द्वार आकर दरवाजा खटखटा रहा है। शिविर में जिला पंचायत सीईओ श्री डीएस रणदा, व अनुविभागीय अधिकारी श्री मिलिंद ढ़ोंके सहित समस्त जिलाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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जायज मांगों का निराकरण 24 घंटों के भीतर

शिविर में भारी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए विधायक श्री सचिन बिरला ने कहा कि शासन ने तय किया है कि जायज मांगो का निराकरण 24 घंटे के भीतर होगा तथा बड़ी समस्या होने पर उसका निराकरण हर हाल में 7 दिनों के भीतर किया जाएगा। साथ ही पात्र व्यक्तियों को लाभ हर हाल में दिया जाए। इसमे कई ऐसी समस्याएं और गरीब तबके के लोग नागरिक है, जिनकी समस्या नही सुनी गई है, उनका भी निराकरण किया जाना उचित है। इसके लिए पूरे जिला प्रशासन के विभागों को आपके द्वार तक भेजा है।

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भू-अधिकार पुस्तिका और बीपीएल कार्ड जैसे समस्याओं का हाथों हाथ निराकरण भी

कलेक्टर श्री डाड ने ग्रामीणों से कहा कि ऐसी कई समस्याएं और मांग होती है, जो हमें पूर्व में आयोजित हुए शिविरों में सामने आई है। सबसे अधिक मांग पीएम आवास, बीपीएल कार्ड, शौचालय तथा भू-अधिकार पुस्तिका के संबंध में प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि शिविर में भू-अधिकार पुस्तिका के संबंध में आने वाले आवेदनों पर संबंधित व्यक्ति का रिकार्ड देखकर तत्काल भू-अधिकार पुस्तिका बनाने की कार्यवाही की जाती है। ऐसे ही बीपीएल कार्ड को लेकर यदि आसपास के गांव का आवेदन प्राप्त होता है, तो 3 लोगों की समिति जो पूर्व से निर्धारित है, वह जांच करके उसी दिन बीपीएल कार्ड बनाएगी। वहीं कलेक्टर श्री डाड ने पीएम आवास को लेकर स्पष्ट रूप से कहा कि एक कमरे के ऐसे मकान, जो कच्चे है, उनके मकान बनाने की कार्यवाही की जा चुकी है या अभी प्रचलन में है। जबकि जिनके दो कमरे कच्चे है, उनके मकान बनाने की कार्यवाही शीघ्र ही प्रारंभ होगी। पीएम आवास के लिए पात्र व्यक्ति क ही मकान बनाए जाएंगे। पात्रता नहीं होने के कारण कई लोगों के आवेदन अस्वीकार कर दिए जाते है।

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बलीराम को ऋण पुस्तिका और मुकुंद को हाथों हाथ बीपीएल कार्ड बनाकर दिया

शिविर के दौरान भू-अधिकार पुस्तिका को लेकर आए आवेदनों का हाथों हाथ 5 ऋण पुस्तिकाएं प्रदान की गई। इनमें कानापुर की देवकीबाई, बलीराम, कातोरा के सुशिल व कातोरा के ही मिश्रीलाल मंशाराम व मिश्रीलाल रामेश्वर शामिल है। वहीं डुडगांव के मुकुंद राजाराम व सोनू पिता रमेश तथा कानापुर के गेंदालाल नत्थू को बीपीएल में शामिल करने के आवेदन पर जांच करने के उपरांत इनके कार्ड शिविर में ही प्रदान किए गए। इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा 17 किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, दो हितग्राहियों को स्वरोजगार योजना के अंतर्गत 3-3 लाख रूपए के ऋण और सामाजिक न्याय विभाग द्वारा ट्रायसिकल भी वितरित की गई। शिविर में 1110 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर कार्यवाही लगातार जारी है।

खाताधारक को बैंक कभी फोन नही करती

शिविर में पुलिस अधीक्षक श्री सुनील पांडेय ने कहा कि आजकल डिजीटल युग मे जिस तरह की समस्याएं थानों पर आ रही है, उससे कहना पड़ता है कि बैंक कभी भी अपने खाताधारक से फोन पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं करती है। अगर आप लोगों को बैंक से संबंधित कोई समस्या है, तो सीधी बैंक जाकर पता कीजिए। बैंक से संबंधित कोई भी जानकारी फोन पर न दें। पुलिस अधीक्षक श्री पांडेय ने अभिभावकों से कहा कि यदि बहुत आवश्यक है, तो ही अपने बच्चों को एंड्रॉयड या स्मार्ट फोन दे, अन्यथा नही दें। इन दिनों सोशल मीडिया और डिजीटल मीडिया के उपयोग से कई फोटो-विडियों का अधिकांश दुरुपयोग हो रहा है। अपने बच्चों को सोच समझकर ही ऐसे मोबाईल प्रदान करें।

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