आवारा पशुओं के सामने लाचार नगर परिषद
पेटलावद (मनीष कुमट) - आवारा पशु पेटलावद नगर परिषद क्षेत्र की पहचान बन गए हैं। सड़क पर इनका साम्राज्य इस कदर है।कि शहर की ट्रैफिक व्यवस्था इनकी मर्जी से चलती है। इनके सामने नगर परिषद प्रशासन ने भी घुटने टेक दिए हैं। आप चाहें जिस सड़क से गुजरें आपका सामना आवारा पशुओं से होना तय है। आवारा पशुओं के कारण लोग जाम की समस्या प्रतिदिन झेलते हैं। सबसे बड़ी समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी आक्रामक या नाराज पशु से सामना हो जाए। कई बार तो सड़क पर चलने वाले इससे घायल भी हो जाते हैं। नगर परिषद प्रशासन ने 20 दिन पहले अभियान जरूर चलाया था। इसमें दर्जनों आवारा पशुओं को पकड़ा गया था। पशु के मालिकों से जुर्माना की वसूला गया, लेकिन अभियान के रुकते ही फिर से वही हालात हो गए। सड़क पर आवारा घूमने वाले पशुओं में गाय,सांड , गधे आदि की संख्या अधिक है। बता दें कि आम तौर पर दूध दुहने के बाद पशुपालक गाय को सड़क पर खुला छोड़ देते हैं। शाम को पशु की वे खोजबीन करते हैं।
आवारा पशुओं का यहां लगता है जमावड़ा
वैसे तो नगर की हर सड़क पर आवारा पशुओं को देखा जा सकता है। वहीं कुछ खास स्थान पर इनकी तादात अधिक होती है। फलस्वरूप वहां आवागमन भी प्रभावित होता है। श्रद्धांजलि चौक, गांधी चौक, झंडा बाजार , पुराना बस स्टैंड, आदि स्थल पर समूह में आवारा पशुओं को देखा जा सकता है। वैसे तो किसी भी वक्त वे सड़क के बीचोबीच खड़े हो जाते हैं।
पिछले अभियान में पकड़े गए थे
नगर प्रशासन ने 20 दिन पहले चलाए गए अभियान में आवारा पशुओं को पकड़ा था। इनके मालिकों से ₹500 रुपये दंड की वसूली कर उन्हें इस हिदायत के साथ पशुओं को वापस किया गया था कि वे इन्हें घर पर ही बांधकर रखेंगे। हालांकि अभियान के बंद होते ही फिर पुरानी स्थिति बरकरार हो गई। नगर परिषद प्रशासन की शिथिलता से दो से तीन दिन अभियान चलने के बाद बंद हो गया। यह अभियान भी काफी दबाव के बाद चला था। आवारा पशु के हमलावर होने के कारण लोगों के घायल होने की के बाद नगर प्रशासन ने अभियान चलाया था। सांड़ को पकड़कर वापस नगर में छोड़ दिया गया बाद अभियान रुक गया। बता दें कि आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए अभी तक कोई अभियान नहीं शुरू किया गया है और न आगे इस प्रकार की नगर परिषद प्रशासन की कोई योजना है।
लाखों रूपयें से बने कांजी हाउस में भरा भंगार
नगर परिषद द्वारा पूर्व में लाखों रूपयें खर्च कर नगर परिषद के पिछे कांजि हाउस बनाया गया था जिससे की नगर में घुम रहें मवेशियों को वहां रखा जाए, लेकिन परिषद की लापरवाहीं व उदासिनता के कारण उक्त कांजि हाउस में आज भी भंगार भरा हुआ व ताला लगा हुआ है, लाखों रूपयें से बने इस कांजी हाउस का उपयोग केवल भंगार भरने में किया जा रहा है।
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