व्यायाम शाला का पुनः निर्माण जनहित में है
अड़ंगे डालने वाले तत्व शहर के सौहाद्र पूर्ण माहौल का सम्मान करे
अलीराजपुर (अली असगर बोहरा) - नगर की रियासत कालीन धार्मिक धरोहर पंचेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में हिंदू धर्म के ही दो पक्षों के बीच श्री पवनपुत्र व्यायाम शाला निर्माण को लेकर बिना वजह का विवाद चल रहा है। जिसकों लेकर दोनों पक्षों के बीच नौबत मारपीट, पुलिस थाना, रैली, प्रदर्शन से लेकर एसपी साहब को ज्ञापन देने तक आ पहंुची हैं। नगर के अनेक बुद्धिजीवियों व जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को लेकर दिन प्रतिदिन बढते जा रहे विवाद व गिरते हुए स्तर को नगर हित में नहीं बताते हुए इसे धार्मिक स्थल की साख को क्षति पहुचाने वाला कार्य बताया हैं। व्यायाम शाला को गिराने वाले कतिपय लोग इसके पुनः बनाने वाले मामले में बिना वजह से अपने निजी स्वार्थो की पूर्ति हेतु अड़ंगे डालने में लगे है वहीं दूसरी ओर इस मामले में नया मोड़ आया है। क्षेत्रीय विधायक मुकेश पटेल ने इस मामले में कहा कि बिना वजह दोनों पक्ष विवाद में पड़े है। व्यायाम शाला तो वहां सालों से लग रही थी जिसका निर्माण नगर हित में है किंतु यदि कुछ बिंदुओं पर दो पक्षों के बीच विवाद है तो उसे बैठकर सुलझाया जाए। पूर्व विधायक नागरसिंह चैहान ने कहा कि जमीन सरकारी है जहां पर सालों से व्यायामशाला चल रही है। मैंने स्वयं ने व्यायामशाला में कसरत की हैं। रिकार्ड में भी है व्यायाम शाला बनना चाहिए। इसके साथ ही नगर में व्यायाम शाला के पुराने सदस्यों ने भी व्यायाम शाला निर्माण के पक्ष में अपनी सहमति देते हुए इस विवाद को बिना वजह का विवाद बताया हैं। सरकारी जमीन पर अपने अपने हित साधने के दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाकर आंदोलन कर रहे है। ऐसी स्थिती में यदि जिला प्रशासन ने इस मामले में अपना हस्तक्षेप किया तो दोनों पक्ष प्रभावित होंगे। ऐसी स्थिती में यदि यह विवाद लंबा चला तो दोनों पक्षों को काफी नुकसान हो जाएगा यह बात नगर के अनेक बुद्धिजीवी कह रहे है।
मंदिर भी सरकारी ही है।
मिली जानकारी के अनुसार रियासत काल के समय सुक्कड़ नदी के किनारे तत्कालिन महाराजा प्रतापसिंहजी के समय घाट का निर्माण किया गया था। जहां पर अति प्राचीन पंचमुखी शिवलिंग था जिस पर पंचेश्वर महादेव मंदिर बना हुआ था। इस मंदिर के समीप ही रियासत काल के समय एक भवन चार कमरों का भवन बनाया गया था जिसे तत्कालिन समय में संत निवास कहा जाता था। इस भवन के पीछे एक बाउंड्रीवाल से घिरा हुआ एक खुला हुआ परिसर था। देश आजाद हुआ और आलीराजपुर रियासत का विलय मध्यभारत प्रांत में हुआ तो अधिकांश सार्वजनिक रियासतकालीन भवन लोक निर्माण विभाग के अधीन चले गए। लोक निर्माण विभाग के आधिपत्य के इस भवन के पिछले भाग में आज से 54 साल पहले सन् 1965 में उस समय के युवाओं ने जिसमें कई स्वर्गवासी हो चुके है कुछ लोग बचे है जिसमें स्वर्गीय कमल सेन, श्री अशोक ओझा ,श्री भिंडा गुरु, श्री चौधरी जी, मांगीलाल उस्ताद आदि ने व्यायामशाला आरंभ की जिसका कई सालों से सफलता पूर्वक संचालन समय समय पर आने वाले युवाओं के द्वारा किया जाता रहा। 1984 में यँहा श्री पवन पुत्र हनुमानजी का मंदिर भी व्यायाम शाला सदस्यों ने बनाया हैं। कालांतर में यह भवन आगे की और से कुछ क्षतिग्रस्त होता गया, जँहा कभी संत रुकते थे व जिसमे स्कूल लगती थी, इस हिस्से का कई दशक तक व्यायाम शाला ने मेंटनेंस भी किया, परन्तु श्री पंचेश्वर मंदिर समिति और और वहाँ की कथित भजन मंडली ने इसमे चुटकी भर सीमेंट भी नही लगाई। इसके तीन कक्षों में सन 2007 तक शासकीय प्राथमिक स्कूल बाहरपुरा भी लगती रही। इसके बाद से यह भवन आगे से कुछ जीर्ण शीर्ण होता गया किंतु व्यायाम शाला वाला हिस्सा नियमित देखरेख व बेहतरीन मेंटेनेंस से मजबूत व उपयोगी बना रहा, जिससे यहां पर व्यायाम शाला निरंतर लगती रही। इसी व्यायामशाला से कई नामी पहलवान भी बनकर निकले जिन्हौंने संभाग व प्रदेश स्तर तक कुश्ती खेल में अपना नाम कमाया। जिसमें केशव चव्हाण, जगदीश पहलवान, अशोक ओझा, एड. रमन सोलंकी शैलू राठौर, सुरेश परिहार, बच्चू भाटिया, चंदू विश्वकर्मा, मोहन भामदरे, महेश विश्वकर्मा, नवीन सेन, आशुतोष पंचोली, गुलाम बाबा, राधेश्याम वर्मा, प्रकाश वर्मा टाइगर, प्रकाश सेन, दौलत चौधरी, सुनील डुडवे, विक्रम सेन, अनिल डुडवे, एड. मनीष शर्मा, मनोज विश्वकर्मा, राकेश सेन, सोनू पहलवान, श्याम डुडवे, विष्णु चौधरी, मुकेश बारेला, अंकलेश तंवर, पंकज राठौर, विजय वर्मा, जितेंद्र पहलवान, श्याम बाबा मैलाना, धर्मेंद्र सोलंकी, प्रकाश चौहान, सुनील चौहान, गजेंद्र सोलंकी, अमन चौहान, राहुल तोमर, शेरा, बबलू राठौड़, सुनील डावर, बाबु भाई, लोकेंद्र सोलंकी, गोविंद सिसोदिया, शक्ति डुडवे, पवन सिसोदिया रिंकू जोशी आदि शामिल है जो यूनिवर्सिटी व प्रदेश स्तर तक कुश्ती खेल चुके है। इसी दौरान सन 90 के दशक में कुछ अन्य युवा व्यायाम शाला से जुड़े और 1993 में इसका विधिवत गठन कराया गया। जिसमें विक्रम सेन को अध्यक्ष बनाया गया और तभी से सेन इसके अध्यक्ष हैै और व्यायामशाला को पुनः बनाने की लड़ाई इसी वजह से कर रहे है।
इसलिए हो रहा है विवाद
पंचेश्वर मंदिर प्रांगण में स्थित व्यायामशाला भवन व प्रांगण को दिसंबर 2018 में अचानक से एक रात को जेसीबी लगाकर ध्वस्त कर दिया गया। क्यों कि पंचेश्वर मंदिर के भक्तों का एक समूह इस पूरे परिसर पर निगाहे गढ़ाए हुए था। भक्तों की सोच यह थी कि इस पूरे परिसर पर उनका ही हक है। जिसका उपयोग करने का अधिकार सिर्फ उनका ही है। इस खुले परिसर में धार्मिक आयोजन कराने की आड़ में नगर के एक समाज विशेष के मंसूबे वहां पर धर्मशाला निर्माण के है। चूंकि पूरा परिसर सरकारी है, मंदिर सरकारी है व्यायाम शाला का भवन भी सरकारी था। जबकि श्री पंचेश्वर मंदिर समूह जो इस व्यायाम शाला भवन से 250 फिट दूर है, इस मंदिर के परिसर पर जो लोग धार्मिक आयोजन व भजन किर्तन कर रहे है, उसमे से गिनती के कुछ लोग इस व्यायाम शाला पर अपना अधिकार समझने में लग गए है , वहीं व्यायाम शाला के संचालन कर्ता इस पर अपना हक जता रहे है, यानी व्यायाम शाला को पुनः व्यवस्थित बनाना चाहते हैं, ताकी आमजन यँहा निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं पिछलें पाँच दशक की तरह ही पुनः बेहतरीन तरीके से प्राप्त कर सके। वास्तविकता यह है कि दोनों ही पक्षों का अपने अपने परिसर में कोई मालिकाना हक नहीं है। वे वहां पर सिर्फ अपने अपने स्तर की गतिविधियां चला रहे हैं। इसी आधार पर दोनों अपना दावा जता रहे है। अब चूंकि अचानक से व्यायामशाला भवन को ध्वस्त कर दिया गया तो वहां पर नई व्यायाम शाला निर्माण के लिए कई बार दोनों पक्षों के सदस्यों की आपसी सहमति जगह छोड़ने व निर्माण को लेकर हो चुकी थी। जब व्यायाम शाला बाउंड्रीवाल निर्माण का काम आरंभ हुआ तो दोनों पक्ष के बीच कहा सुनी हो गई नौबत मारपीट तक जा पहुँची। इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा है। इस मामले में जो लोग व्यायामशाला के अध्यक्ष विक्रम सेन के विरोधी हैं, व व्यायामशाला नहीं बनने देने के पक्ष वाले गिनती के लोग है, वे सब एक होकर व्यायामशाला का विरोध कर रहे है। विवाद की असली वजह ही यही है। जबकी इसी परिसर के पास स्थित एक अन्य कक्ष में व्यायाम शाला आज भी अनवरत जारी हैं।
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