शिक्षा के लिए जतन : एक और खुले आसमान के नीचे पढ़ने को विवश छात्राएं, तो दूसरी और जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुँचते है बच्चें
दो तस्वीर जो सरकार की हकीकत बयाँ कर रही है
झाबुआ (अली असगर बोहरा) - जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित बिसौली मोकमपुरा रोड जो करीब पांच गांवों को आपस मे जोड़ता है उस रोड के बीच मे आरिएस विभाग द्वारा बनाया गया पुलिया जिसकी लागत करीब पचास लाख रुपये की थी जो पिछले दिनों तेज बरसात होने के कारण बह गया था जिसकी आज तक सुध नही ली गयी
जिस कारण आस पास के गांव में रहने वाले स्कूली बच्चो को अपनी जान जोखिम में डालकर टूटे हुए पुलिया के ऊपर से कूद कर स्कूल जाना पड़ रहा है छोटे छोटे बच्चे एक दूसरे को पकड़कर पुल से कूदते है जिनमे एक एक कर बच्चे को मदद कर नीचे उतारा जाता है तो वही पास में नदी और कीचड़ होने से इन स्कूली बच्चो को रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है पर जिम्मेदारो का इस ओर कोई ध्यान नही है कहि इस तरह से जान जोखिम में डालकर आना स्कूली बच्चों को भारी न पड़ जाए
जब पुल टूटा था तब तहसीलदार वगेरह आये थे उन्होंने टूटे हुए पुल के फोटो भोपाल भिजवाए थे पर अब तक कोई आदेश नही आया
नया भवन बनकर तैयार पर विभाग के अधिकारी नही कर रहे नए भवन में स्कूल शिफ्ट
पुराने भवन में जगह कम होने के अभाव में कक्षा के बाहर बैठकर पढ़ाई करने मज़बूर छात्राए
जहाँ एक ओर सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नई नई योजनाएं लागू कर रही है वही कल्यानपुरा स्थित कन्या हाईस्कूल जो कि मिडिल स्कूल में संचालित हो रही जहाँ ओर हाई स्कूल की कुल 400 छात्राए अपनी पढ़ाई कर रही है तो मिडिल स्कुक की 160 छात्राए पढ़ाई कर रही है कुल 8 कमरे स्कूल में है जिसमे 560 छात्राए पढ़ाई कर रही है पर स्कूल में छात्राए न तो बराबर बेठ सकती है न खड़े रह सकती है ऐसे में सवाल यह हो रहा है कि इस तरह से छात्राए पढ़ाई करें तो कैसे करे जिस कारण कुछ दिनों से यह छात्राए मजबूरन स्कूल के बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है जहाँ पर धूप हो या छांव या बरसात हो यह सभी समस्याओ से छात्राओ को परेशानी उठाना पड़ रहा है सबसे बड़ी समस्या यह कि यहाँ पर सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है यहाँ पिछले दिनों प्राचार्य का रिटायरमेंट हो जाने का कारण अभी तक प्राचार्य का पद खाली पड़ा हुआ जिस कारण स्कूल का मैनेजमेंट भी बन्द पड़ा है ।
जब छात्राओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारी नई हाई स्कूल बनकर तय्यार हो चुकी है जिसका शुभारम्भ भी मंत्री जी द्वारा हो चुका है पर अभी तक हमारी स्कूल को वहाँ शिफ्ट नही किया गया जिस कारण हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इस स्कूल में न फर्नीचर है न बैठने की व्यवस्था एक कमरे में हम इतने सारे लोग नही बैठ सकते जिस कारण मजबूरन हमे बाहर बैठकर पढ़ाई करना पढ़ रहा है ।
यहां बोले जिम्मेदार
बालिकाओं को यहां पढ़ाई करने में बड़ी परेशानी आती है जगह का अभाव कम होने के कारण छात्राए बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है हमने कई बार विभाग के बड़े अधिकारों को अवगत करवाया और अभी तक कोई सुनवाई नही नही हुई है - परमार जी प्रभारी प्राचार्य कन्या हाई स्कूल कल्यानपुरा
इस सम्बंध में जिला सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य के मोबाइल और सम्पर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया।
दो तस्वीर जो सरकार की हकीकत बयाँ कर रही है
झाबुआ (अली असगर बोहरा) - जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित बिसौली मोकमपुरा रोड जो करीब पांच गांवों को आपस मे जोड़ता है उस रोड के बीच मे आरिएस विभाग द्वारा बनाया गया पुलिया जिसकी लागत करीब पचास लाख रुपये की थी जो पिछले दिनों तेज बरसात होने के कारण बह गया था जिसकी आज तक सुध नही ली गयी
जिस कारण आस पास के गांव में रहने वाले स्कूली बच्चो को अपनी जान जोखिम में डालकर टूटे हुए पुलिया के ऊपर से कूद कर स्कूल जाना पड़ रहा है छोटे छोटे बच्चे एक दूसरे को पकड़कर पुल से कूदते है जिनमे एक एक कर बच्चे को मदद कर नीचे उतारा जाता है तो वही पास में नदी और कीचड़ होने से इन स्कूली बच्चो को रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है पर जिम्मेदारो का इस ओर कोई ध्यान नही है कहि इस तरह से जान जोखिम में डालकर आना स्कूली बच्चों को भारी न पड़ जाए
जब पुल टूटा था तब तहसीलदार वगेरह आये थे उन्होंने टूटे हुए पुल के फोटो भोपाल भिजवाए थे पर अब तक कोई आदेश नही आया
नया भवन बनकर तैयार पर विभाग के अधिकारी नही कर रहे नए भवन में स्कूल शिफ्ट
पुराने भवन में जगह कम होने के अभाव में कक्षा के बाहर बैठकर पढ़ाई करने मज़बूर छात्राए
जहाँ एक ओर सरकार शिक्षा के क्षेत्र में नई नई योजनाएं लागू कर रही है वही कल्यानपुरा स्थित कन्या हाईस्कूल जो कि मिडिल स्कूल में संचालित हो रही जहाँ ओर हाई स्कूल की कुल 400 छात्राए अपनी पढ़ाई कर रही है तो मिडिल स्कुक की 160 छात्राए पढ़ाई कर रही है कुल 8 कमरे स्कूल में है जिसमे 560 छात्राए पढ़ाई कर रही है पर स्कूल में छात्राए न तो बराबर बेठ सकती है न खड़े रह सकती है ऐसे में सवाल यह हो रहा है कि इस तरह से छात्राए पढ़ाई करें तो कैसे करे जिस कारण कुछ दिनों से यह छात्राए मजबूरन स्कूल के बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है जहाँ पर धूप हो या छांव या बरसात हो यह सभी समस्याओ से छात्राओ को परेशानी उठाना पड़ रहा है सबसे बड़ी समस्या यह कि यहाँ पर सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पूरा स्कूल चल रहा है यहाँ पिछले दिनों प्राचार्य का रिटायरमेंट हो जाने का कारण अभी तक प्राचार्य का पद खाली पड़ा हुआ जिस कारण स्कूल का मैनेजमेंट भी बन्द पड़ा है ।
जब छात्राओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमारी नई हाई स्कूल बनकर तय्यार हो चुकी है जिसका शुभारम्भ भी मंत्री जी द्वारा हो चुका है पर अभी तक हमारी स्कूल को वहाँ शिफ्ट नही किया गया जिस कारण हमें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है इस स्कूल में न फर्नीचर है न बैठने की व्यवस्था एक कमरे में हम इतने सारे लोग नही बैठ सकते जिस कारण मजबूरन हमे बाहर बैठकर पढ़ाई करना पढ़ रहा है ।
यहां बोले जिम्मेदार
बालिकाओं को यहां पढ़ाई करने में बड़ी परेशानी आती है जगह का अभाव कम होने के कारण छात्राए बाहर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर है हमने कई बार विभाग के बड़े अधिकारों को अवगत करवाया और अभी तक कोई सुनवाई नही नही हुई है - परमार जी प्रभारी प्राचार्य कन्या हाई स्कूल कल्यानपुरा
इस सम्बंध में जिला सहायक आयुक्त प्रशांत आर्य के मोबाइल और सम्पर्क करना चाहा तो उन्होंने फोन रिसीव नही किया।

