आत्मा में लगे रोग को मिटाने के लिए जिनवाणी का श्रवण करें
मेघनगर (जियाउल हक कादरी) - पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन वरिष्ठ स्वाध्यायी प्रदीप श्रीमाल ने अंतगढ़दशांग सूत्र का महत्व बताते हुए कहा कि जब तक बीमारी पूरी तरह निकलती नहीं तब तक दवाई लेना पड़ती है इसी प्रकार हमारी आत्मा में भी अनादि काल से क्रोध,मान,माया लोभ,राग,द्वेष रुपी रोग लगा है। इनको मूल रुप से निकालने के लिए बार-बार अर्थात प्रतिवर्ष इस सूत्र के साथ जिनवाणी का श्रवण कई वर्षों से कराया जाता है। अंतगढ़ सूत्र के मूल तथा अर्थ का वाचन वरिष्ठ स्वाध्यायी कमलेश संघवी ने किया।
इस अवसर पर लगभग 10 तपस्वियों ने बेला तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किए
इस अवसर पर धर्मदास जैन युवा संगठन की ओर से स्थानीय अणु सौभाग्य सूर्य संस्कारशाला के विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम की घोषणा के साथ ही पुरस्कार भी दिए गए जिसमें टॉप टेन में श्रेया सुनिल खेमसरा तथा प्रथम पुरस्कार कुमकुम बड़ौला एवं तनीषा मेहता द्वितीय पुरस्कार और हर्षी पीचा तथा प्रियल पावेचा तथा तृतीय पुरस्कार मयंक बड़ौला एवं दिव्य ओरा ने प्राप्त किये।अतिथि सत्कार का लाभ सुरेशचंद्र रतनलाल धोका परिवार 'मोक्ष' ने लिया। प्रभावना का लाभ प्रवीण,विजेंद्र,अभय सोनी ने लिया।इस अवसर पर प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी म. सा. के जीवन पर आधारित लिखित प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम भी घोषित किए गए जिसमें 35 से अधिक प्रतियोगियों ने भाग लिया था।संचालन मनीष नाहटा ने किया।
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