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| रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रशासन का एक्शन, आयुष्मान अस्पताल में कलेक्टर-एसपी की अचानक दबिश |
रीवा। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया। आयुष्मान योजना से जुड़े एक निजी अस्पताल में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के अचानक पहुंचने से अस्पताल प्रबंधन और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हलचल देखी गई। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित बिंदुओं की जांच की। हालांकि कलेक्टर की ओर से इसे रूटीन जांच बताया गया है, लेकिन एक ही अस्पताल में जिला प्रशासन के दो प्रमुख अधिकारियों के अचानक पहुंचने को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद सबसे अहम सवाल यह है कि क्या अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों के उपचार, दस्तावेजी प्रक्रिया अथवा सरकारी भुगतान से संबंधित किसी शिकायत या जानकारी के आधार पर जांच की गई? अथवा यह सामान्य निरीक्षण का हिस्सा था। इन सवालों का स्पष्ट जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
कलेक्टर-एसपी की मौजूदगी ने बढ़ाई चर्चा
आम तौर पर स्वास्थ्य संस्थानों की जांच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाती है। ऐसे में कलेक्टर के साथ पुलिस अधीक्षक का अचानक अस्पताल पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। यदि निरीक्षण पूरी तरह रूटीन था तो दोनों वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से फिलहाल किसी गंभीर शिकायत या अनियमितता की पुष्टि नहीं की गई है।
आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में मरीजों के उपचार और सरकारी भुगतान की व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन की अचानक जांच को निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब जांच में क्या सामने आता है, इस पर सभी की नजर है।
अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक भी बड़ा सवाल
रीवा और मऊगंज जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक दूसरा गंभीर मुद्दा भी लगातार चर्चा में है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अवैध नर्सिंग होम और बिना निर्धारित वैधानिक अनुमति के संचालित किए जा रहे क्लीनिकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कथित रूप से अपात्र या अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा चिकित्सा सेवाएं संचालित किए जाने के आरोप भी सामने आते रहे हैं।
ऐसे में सवाल यह भी है कि यदि वर्षों से अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित हो रहे हैं तो इनके खिलाफ नियमित और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। साथ ही, इनके संचालन के पीछे कथित संरक्षण अथवा आर्थिक लेन-देन की शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और किसी अधिकारी की संलिप्तता की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती।
कार्रवाई के बाद सामने आएंगे कई सवालों के जवाब
रीवा-मऊगंज क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई को लेकर अब लोगों की नजर जांच के परिणाम पर है। यदि अस्पताल में कोई अनियमितता सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की आवश्यकता होगी। वहीं यदि जांच में सभी व्यवस्थाएं सामान्य पाई जाती हैं, तो प्रशासन की ओर से इसकी स्थिति भी स्पष्ट की जा सकती है।
फिलहाल कलेक्टर और एसपी की अचानक अस्पताल में पहुंची टीम की कार्रवाई ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है। अब यह जांच कितनी व्यापक है और इसमें क्या तथ्य सामने आते हैं, इसकी जानकारी आधिकारिक रिपोर्ट या प्रशासन की ओर से जारी होने वाली प्रेस विज्ञप्ति के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रमुख सवाल: क्या यह केवल रूटीन निरीक्षण था, या आयुष्मान अस्पताल को लेकर प्रशासन को कोई शिकायत अथवा विशेष इनपुट मिला था? साथ ही रीवा-मऊगंज में अवैध नर्सिंग होम और क्लीनिकों के संचालन पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी—इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
