बेटी-नवजात की मौत, न्याय नहीं मिला तो इच्छामृत्यु की मांग; जांच की समय-सीमा पूरी, पिता ने कलेक्टर से मांगा जवाब

बेटी-नवजात की मौत, न्याय नहीं मिला तो इच्छामृत्यु की मांग; जांच की समय-सीमा पूरी, पिता ने कलेक्टर से मांगा जवाब

रीवा। संजय गांधी अस्पताल में बेटी कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। न्याय और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे पिता रामशिरोमणि मिश्रा ने अब इच्छामृत्यु की मांग उठाई है। बेटी और नवजात को खोने के बाद न्याय की उम्मीद में भटक रहे पिता ने कलेक्टर से मुलाकात कर जांच की प्रगति और कार्रवाई को लेकर जवाब मांगा है।

परिजनों के अनुसार, मामले में न्याय की मांग को लेकर रामशिरोमणि मिश्रा ने 15 दिनों तक आमरण अनशन किया था। इसके बाद प्रशासन ने मजिस्ट्रियल जांच शुरू कराई थी और जांच के लिए एक माह की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। लेकिन परिवार का कहना है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें अब तक जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।

एक माह की समय-सीमा पूरी, फिर भी जवाब का इंतजार

पिता का सवाल है कि जब प्रशासन ने जांच के लिए समय-सीमा तय की थी तो अब तक रिपोर्ट की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई? क्या जांच पूरी हो चुकी है? यदि रिपोर्ट तैयार है तो उस पर कार्रवाई कब होगी? और यदि जांच अभी अधूरी है तो देरी का कारण क्या है?

न्याय की गुहार लगाते-लगाते इच्छामृत्यु की मांग

बेटी और नवजात को खोने का दर्द झेल रहे रामशिरोमणि मिश्रा की पीड़ा अब इच्छामृत्यु की मांग के रूप में सामने आई है। उनका संघर्ष इस सवाल को भी सामने लाता है कि गंभीर मामलों में पीड़ित परिवारों को समय पर जांच, पारदर्शिता और न्याय का भरोसा दिलाने की प्रशासनिक व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग

अब परिवार की मांग है कि मजिस्ट्रियल जांच की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए, जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय हो और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

संजय गांधी अस्पताल से जुड़े इस मामले में अब जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल केवल जांच रिपोर्ट का नहीं, बल्कि उस परिवार को जवाब देने का भी है जिसने अपनी बेटी और नवजात दोनों को खोया है।

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