प्रार्थना हॉस्पिटल में 21 वर्षीय युवक की मौत, ओवरडोज और इलाज में लापरवाही के आरोप

प्रार्थना हॉस्पिटल में 21 वर्षीय युवक की मौत, ओवरडोज और इलाज में लापरवाही के आरोप

रीवा। शहर के प्रार्थना हॉस्पिटल में 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान ओवरडोज दिया गया, चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई और हालत बिगड़ने के बावजूद युवक को समय पर संजय गांधी अस्पताल रेफर नहीं किया गया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

परिजनों के मुताबिक, अक्षत को पहले संजीवन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर देर रात डॉक्टर मुकेश तिवारी उसे प्रार्थना हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार का दावा है कि अक्षत अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत से परिजन गहरे सदमे में हैं।

परिजनों ने इलाज के नाम पर दो से तीन लाख रुपये खर्च होने का दावा करते हुए अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि युवक को समय पर उच्च चिकित्सा केंद्र नहीं भेजा गया। परिवार ने शव को हटाने की कोशिश किए जाने और मेडिकल दस्तावेजों से कुछ पन्ने गायब होने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ओवरडोज, इलाज में लापरवाही और दस्तावेजों से छेड़छाड़ संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मौत के वास्तविक कारण और किसी की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।

निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

रीवा एवं नवीन मऊगंज जिले में निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम की संख्या बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तथा संस्थानों के नियमन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर आवश्यक पंजीयन, वैध अनुमति और जरूरी प्रमाणपत्रों के बिना चिकित्सा संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की निगरानी और निरीक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता की जांच जरूरी है।

मेडिकल स्टोरों पर चिकित्सकीय परामर्श दिए जाने की शिकायतें भी चिंता का विषय हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि चिकित्सा सेवाएं केवल निर्धारित योग्यता और वैधानिक अनुमति रखने वाले व्यक्तियों द्वारा ही दी जाएं।

अक्षत की मौत का मामला एक परिवार की क्षति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों की सुरक्षा, आपातकालीन रेफरल व्यवस्था और निजी स्वास्थ्य संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने लाता है। अब संबंधित स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, अस्पताल के पंजीयन एवं दस्तावेजों की नियमानुसार जांच हो और जांच में लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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