रीवा-मऊगंज में नशीली कफ सिरप के कथित कारोबार पर सवाल, बड़े सप्लायरों तक कब पहुंचेगी जांच?

रीवा-मऊगंज में नशीली कफ सिरप के कथित कारोबार पर सवाल, बड़े सप्लायरों तक कब पहुंचेगी जांच?

रीवा। ऐतिहासिक विरासत और सफेद शेरों की धरती के रूप में पहचान रखने वाले रीवा में नशीली कफ सिरप के कथित अवैध कारोबार को लेकर चिंता जताई जा रही है। इंटरनेट पर शहर को ‘कोरेक्स सिटी’ कहे जाने की चर्चाओं के बीच पुलिस की कार्रवाई और नशे के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाने की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मुख्य सवाल यह है कि प्रतिबंधित नशीली कफ सिरप युवाओं तक कैसे पहुंच रही है और इसकी आपूर्ति के पीछे सक्रिय लोगों की पहचान करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

छोटे विक्रेताओं से आगे बढ़े जांच

नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए केवल खुदरा स्तर पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि जांच में सिरप की खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जाए। जिन मामलों में विक्रेताओं की गिरफ्तारी होती है, उनमें यह पता लगाना भी अहम है कि उन्हें सिरप कहां से मिली और आपूर्ति करने वाले लोग कौन हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की संलिप्तता जांच और प्रमाण के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।

खाली शीशियों की शिकायतों की जांच जरूरी

रीवा और मऊगंज क्षेत्र में कफ सिरप की खाली शीशियों को लेकर उठने वाली चिंताओं पर भी संबंधित विभागों को ध्यान देने की जरूरत है। सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी शीशियां मिलने मात्र से अवैध कारोबार की पुष्टि नहीं होती, लेकिन बार-बार शिकायतें सामने आने पर उनके स्रोत और वास्तविकता की जांच की जानी चाहिए। साथ ही, नशे की समस्या से प्रभावित युवाओं की संख्या के संबंध में आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि स्थिति का सही आकलन हो सके।

बीट प्रभारियों की जवाबदेही पर स्पष्टता जरूरी

नशीले पदार्थों की रोकथाम में स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में बीट प्रभारियों की जवाबदेही तय करने संबंधी कथित निर्देशों पर भी स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। पुलिस विभाग को बताना चाहिए कि नशे से संबंधित शिकायतों पर कितनी कार्रवाई हुई, किन मामलों में लापरवाही पाई गई और क्या किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की गई। किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच और पर्याप्त साक्ष्य जरूरी हैं।

कार्रवाई के साथ जागरूकता भी जरूरी

नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य से भी जुड़ी है। अवैध आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है। स्कूलों, कॉलेजों और समुदायों के स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों से परिचित कराया जाना चाहिए।

रीवा और मऊगंज में नशे के कथित कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही महत्वपूर्ण हो गई है। आपूर्ति शृंखला की जांच, बड़े सप्लायरों के विरुद्ध कार्रवाई, जब्त सामग्री और दर्ज प्रकरणों का विवरण तथा विभागीय निगरानी के परिणाम सार्वजनिक होने चाहिए। इससे नशा विरोधी अभियान की प्रभावशीलता का आकलन किया जा सकेगा और शहर की छवि को लेकर फैल रही चर्चाओं के बीच तथ्यात्मक स्थिति सामने आएगी।



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