रीवा-मऊगंज में सहकारी समितियों के प्रभार पर सवाल, एक व्यक्ति के पास 25 समितियों की जिम्मेदारी का दावा

रीवा-मऊगंज में सहकारी समितियों के प्रभार पर सवाल, एक व्यक्ति के पास 25 समितियों की जिम्मेदारी का दावा

रीवा/मऊगंज। धान खरीदी की तैयारियों के बीच रीवा और मऊगंज जिलों की प्राथमिक सहकारी साख समितियों में प्रशासकों और केंद्र प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों और कर्मचारियों को एक साथ 20 से 25 समितियों तक का प्रभार सौंपा गया है। इससे समितियों के नियमित कामकाज, किसानों के ऋण संबंधी कार्यों और आगामी धान खरीदी व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

शिकायतों के अनुसार, समितियों में ऋण वितरण, वसूली समायोजन और अन्य वित्तीय कार्यों के लिए संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर और स्वीकृति की आवश्यकता होती है। यदि एक ही व्यक्ति के पास कई समितियों की जिम्मेदारी है, तो समय पर कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किसानों को इन कार्यों के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ने के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, प्रभारों की वास्तविक संख्या और कार्यों में देरी की स्थिति की पुष्टि संबंधित आदेशों तथा अभिलेखों से होना जरूरी है।

धान खरीदी केंद्रों के प्रभार को लेकर भी सवाल

धान खरीदी केंद्रों की जिम्मेदारियों को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि कुछ ऐसे कर्मचारियों को महत्वपूर्ण दायित्व दिए जाने की कोशिश हो रही है, जिनके विरुद्ध पहले से शिकायतें लंबित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। प्रशासन को प्रभार संबंधी आदेशों, पात्रता, लंबित शिकायतों और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केंद्रों पर उपज की आवक, तौल, गुणवत्ता परीक्षण, भुगतान और भंडारण की निगरानी महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर अनियमितता की आशंका मिलने पर दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जानी चाहिए, ताकि किसानों के हित प्रभावित न हों।

ऑडिट और निगरानी व्यवस्था पर उठे प्रश्न

सहकारी समितियों के वित्तीय लेन-देन और अभिलेखों की जांच को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि समितियों के ऑडिट और निरीक्षण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी तथा पारदर्शी होनी चाहिए। यदि किसी समिति में अनियमितता की शिकायत लंबित है, तो उसकी जांच की स्थिति और निष्कर्षों को नियमानुसार सामने लाना जरूरी है।

सहकारी संस्थाओं की निगरानी में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि निरीक्षण और ऑडिट निष्पक्ष हों तथा किसी भी अनियमितता पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।

संभागीय आयुक्त और कलेक्टरों से जांच की मांग

इस मामले में जागरूक नागरिकों और किसान संगठनों की ओर से रीवा संभाग के संभागीय आयुक्त तथा रीवा और मऊगंज के कलेक्टरों से प्रभार व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की गई है। सुझाव दिया गया है कि समितियों के प्रशासक नियुक्त करने की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और आवश्यकता के अनुसार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाए। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के शाखा प्रबंधकों को जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी इसी संदर्भ में सामने आया है।

अब महत्वपूर्ण यह है कि प्रशासन प्रभार संबंधी आदेशों, समितियों में लंबित कार्यों, किसानों की शिकायतों और धान खरीदी केंद्रों की नियुक्तियों की तथ्यात्मक जांच कराए। यदि अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे किसानों को समय पर सेवाएं मिलने और धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

Post a Comment

Previous Post Next Post