मध्य प्रदेश में शासकीय भूमि का पूरा हिसाब सार्वजनिक करे सरकार: खसरे-नक्शों के मिलान और सरकारी जमीनों की पारदर्शी समीक्षा की उठी मांग

मध्य प्रदेश में शासकीय भूमि का पूरा हिसाब सार्वजनिक करे सरकार: खसरे-नक्शों के मिलान और सरकारी जमीनों की पारदर्शी समीक्षा की उठी मांग

रीवा - मध्य प्रदेश में शासकीय भूमि की सुरक्षा, राजस्व अभिलेखों में पारदर्शिता और सरकारी जमीनों के वास्तविक रकबे को लेकर एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। विभिन्न क्षेत्रों से यह मांग उठ रही है कि प्रदेश सरकार हर जिले में उपलब्ध शासकीय भूमि का प्रमाणित और जिलेवार विवरण सार्वजनिक करे, ताकि सरकारी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।

वन भूमि, तालाब और गौशालाओं का हो जिलेवार ब्योरा

मांग की गई है कि सरकार वन भूमि, तालाब, श्मशान घाट (शांति धाम), गौशालाओं, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक मार्गों और अन्य संस्थागत भूमियों का अलग-अलग रकबा जारी करे। इसके साथ ही राजस्व विभाग, वन विभाग, शिक्षा और लोक निर्माण विभाग जैसी विभिन्न शासकीय संस्थाओं के पास दर्ज जमीनों का पुराना और डिजिटल रिकॉर्ड मिलान किया जाना चाहिए।

खसरे और राजस्व नक्शों के मिलान की जरूरत

इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू खसरे और राजस्व नक्शों के बीच का अंतर है। कई बार खसरे में पट्टा आवंटन या कब्जे की प्रविष्टियाँ दर्ज हो जाती हैं, लेकिन उसके अनुरूप राजस्व नक्शे में जरूरी बदलाव या संशोधन नहीं किए जाते। इससे भविष्य में सीमांकन, स्वामित्व और भूमि की पहचान को लेकर विवाद की स्थिति पैदा होती है। जानकारों का कहना है कि खसरे की प्रविष्टियों के साथ-साथ मूल नक्शों और डिजिटल अभिलेखों का भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य है।

रीवा के गढ़ स्थित चंदन बाग की भूमि पर चर्चा

रीवा जिले की मंगवां तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़ के खसरा नंबर 146 (चंदन बाग) का मामला भी चर्चा में है। इस भूमि के वन भूमि के रूप में दर्ज होने और वहाँ लंबे समय से कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े रिकॉर्ड्स की सही स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है, ताकि राजस्व और वन विभाग के दस्तावेजों में एकरूपता बनी रहे।

प्रमुख माँगे:

  1. जिलेवार सार्वजनिक हो हिसाब: शासकीय, वन, तालाब, श्मशान और गौशालाओं की भूमि का स्पष्ट रकबा जारी हो।

  2. खसरा और नक्शा मिलान: कागजी प्रविष्टियों और जमीनी नक्शों में विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष सत्यापन अभियान चले।

  3. पट्टे और कब्जों की समीक्षा: पट्टा आवंटन और कब्जों की वैधानिक स्थिति की पारदर्शी जाँच हो।

  4. सार्वजनिक मार्गों का संरक्षण: ग्रामीण रास्तों से लेकर राष्ट्रीय राजमार्गों तक की भूमि का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

  5. जिम्मेदारी तय हो: अभिलेखों में लापरवाही या गड़बड़ी मिलने पर संबंधितों की जवाबदेही तय की जाए।

सरकारी जमीन जनता की धरोहर है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक सुविधाओं और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राजस्व अभिलेखों में पूर्ण पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया जा रहा है।

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