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| सत्र के 4 महीने बीतने के बाद भी लैब में ताले, प्रायोगिक शिक्षा ठप; अटल टिंकरिंग लैब के बजट और प्रयोगशालाओं की जांच की मांग |
रीवा/मऊगंज - रीवा और नवगठित मऊगंज जिले के शासकीय, निजी और अर्धशासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों की प्रायोगिक शिक्षा (Practical Education) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शैक्षणिक सत्र के चार माह (जुलाई से अक्टूबर) बीत जाने के बावजूद कई स्कूलों में अब तक प्रायोगिक कार्य शुरू नहीं होने के आरोप लग रहे हैं, जिससे छात्रों के भविष्य और व्यावहारिक ज्ञान पर असर पड़ रहा है।
लैब सहायकों की कमी और औपचारिकता का आरोप
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, कई सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में न तो नियमित प्रयोग कराए जा रहे हैं और न ही प्रयोगशाला सहायकों (Lab Assistants) की नियुक्ति की गई है। आरोप हैं कि कागजों पर प्रयोगशालाएं संचालित दिखाई जा रही हैं, जबकि धरातल पर उपकरण और रसायन धूल फांक रहे हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं।
अटल टिंकरिंग लैब के बजट पर उठे सवाल
केंद्र सरकार की 'अटल टिंकरिंग लैब' योजना के तहत रीवा जिले के कुछ विद्यालयों को भारी-भरकम अनुदान राशि मिलने की बात सामने आई है। इसके बावजूद ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को इस लैब का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि योजना के तहत स्वीकृत राशि, उपलब्ध उपकरणों और वास्तविक गतिविधियों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए।
कलेक्टर और संभागीय आयुक्त से जांच दल गठित करने की मांग
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और शिक्षा विभाग से एक विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है।
प्रमुख मांगें:
रीवा और मऊगंज के स्कूलों में प्रयोगशालाओं का औचक (Surprise) निरीक्षण हो।
रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का धरातल पर भौतिक सत्यापन किया जाए।
प्रयोगशाला सहायकों के रिक्त पदों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
अटल टिंकरिंग लैब में खर्च हुई राशि और उपकरणों का ऑडिट हो।
सत्र पूरा होने से पहले नियमित प्रायोगिक कक्षाएं शुरू करने की समयबद्ध योजना बने।
प्रशासनिक कदम का इंतजार
विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य से जुड़ी इस व्यवस्था पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। फिलहाल इन आरोपों और दावों पर संबंधित विद्यालयों तथा शिक्षा विभाग के आधिकारिक पक्ष का इंतजार है।
