स्वामित्व योजना के पट्टों और रजिस्ट्रियों की निष्पक्ष जांच की मांग; शासकीय भूमि, तालाब व श्मशान पर आवंटन को लेकर उठे सवाल

स्वामित्व योजना के पट्टों और रजिस्ट्रियों की निष्पक्ष जांच की मांग; शासकीय भूमि, तालाब व श्मशान पर आवंटन को लेकर उठे सवाल

रीवा/मऊगंज - मध्य प्रदेश में ग्रामीण आबादी को संपत्ति का कानूनी अधिकार देने वाली 'स्वामित्व योजना' के तहत जारी पट्टों और रजिस्ट्रियों की प्रक्रिया को लेकर रीवा और मऊगंज जिले में सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने योजना के तहत हुए सर्वे, पात्रता निर्धारण और भूमि आवंटन की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच की मांग की है।

सार्वजनिक और प्रतिबंधित भूमियों के आवंटन पर संशय

आरोप लगाए जा रहे हैं कि सर्वे के दौरान आम रास्तों, श्मशान घाट, मंदिर, तालाब, गौशाला और वन भूमि जैसी सुरक्षित व शासकीय जमीनों का सही तरीके से श्रेणी परीक्षण नहीं किया गया। मांग उठ रही है कि यह जांचा जाए कि क्या आवंटन से पहले संबंधित भूमि की वैधानिक स्थिति और लागू नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

पात्र परिवारों की उपेक्षा और अभिलेखीय विसंगतियां

योजना की मूल भावना वास्तविक भूमिहीन व पात्र ग्रामीण परिवारों को स्वामित्व का अधिकार देना है। हालाँकि, शिकायतों में यह बात सामने आ रही है कि कई वर्षों से रह रहे वास्तविक हकदार लाभ से वंचित रह गए, जबकि कुछ स्थानों पर नियमों को दरकिनार कर पट्टे जारी किए गए। इसके अलावा, सर्वे और पंजीयन कार्यों पर खर्च हुए सरकारी बजट के सही उपयोग को लेकर भी समीक्षा की मांग की जा रही है।

RTI और स्थलीय निरीक्षण से सामने आएगी सच्चाई

मामले की पारदर्शिता के लिए सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत ग्रामवार सर्वे रिपोर्ट, हितग्राहियों के चयन के आधार और पट्टों से संबंधित रिकॉर्ड्स खंगालने की तैयारी की जा रही है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासनिक स्तर पर इन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण नहीं होता, तो यह मामला न्यायिक मंच (कोर्ट) तक भी पहुँच सकता है।

प्रमुख मांगें:

  1. नमूना (Sample) सर्वेक्षण व जांच: जिला कलेक्टर रीवा और मऊगंज द्वारा चयनित गांवों का स्थलीय व दस्तावेजी निरीक्षण कराया जाए।

  2. प्रतिबंधित भूमियों का रिकॉर्ड दुरुस्त हो: तालाब, रास्ते, श्मशान, गौशाला व वन भूमि के राजस्व अभिलेखों का मिलान कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

  3. पात्रों को मिले हक: वंचित रह गए वास्तविक पात्र परिवारों का पुनः सत्यापन कर उन्हें योजना से जोड़ा जाए।

  4. जवाबदेही तय हो: सर्वे व आवंटन प्रक्रिया में लापरवाही या गड़बड़ी पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और ग्रामीण आबादी को पारदर्शी तरीके से उनके अधिकार दिलाने के लिए इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा को बेहद आवश्यक बताया जा रहा है।

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