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| मऊगंज में एसपी की कार्यप्रणाली पर समाजसेवी ने उठाए सवाल, 10 अक्टूबर से आमरण अनशन की चेतावनी |
ज्ञापन में अवैध शराब एवं मादक पदार्थों के कारोबार को कथित संरक्षण, थाना एवं चौकी प्रभारियों की पदस्थापना तथा स्थानांतरण में कथित आर्थिक लेन-देन, पत्रकारों के खिलाफ दर्ज मामलों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। तिवारी का कहना है कि इन शिकायतों को लेकर वे पुलिस मुख्यालय भोपाल में पुलिस महानिदेशक को भी शिकायत दे चुके हैं।
थाना-चौकी प्रभार की प्रक्रिया की जांच की मांग
संतोष तिवारी ने मांग की है कि जिले में थाना और चौकी प्रभारियों की पदस्थापना, स्थानांतरण तथा संबंधित अधिकारियों के कार्यकाल की भी जांच कराई जाए। इसके अलावा उन्होंने शिकायत में उल्लेखित मामलों से जुड़े पुलिस अधिकारियों एवं संदिग्ध व्यक्तियों के बीच संपर्क या संचार से संबंधित कानूनी रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है।
अवैध शराब और नशे के कारोबार पर सवाल
पत्रकारों से चर्चा के दौरान तिवारी ने आरोप लगाया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों तक अवैध शराब और गांजा, कोरेक्स जैसे नशीले पदार्थों की पहुंच की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन मुद्दों को लेकर वे आंदोलन करेंगे। हालांकि, पुलिस अधीक्षक पर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और ज्ञापन में मुख्य मांग आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की है।
पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा की मांग
तिवारी ने आरोप लगाया कि पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाले कुछ पत्रकारों पर दबाव बनाने अथवा आपराधिक मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ऐसे मामलों में दर्ज शिकायतों, उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस जांच की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग की है।
10 अक्टूबर से आमरण अनशन की चेतावनी
तिवारी ने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे 10 अक्टूबर 2026 से कलेक्टर कार्यालय मऊगंज के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष नहीं, बल्कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच और कानून-व्यवस्था को लेकर जनता का विश्वास कायम करना है।
मामले में अब निगाह प्रशासन की ओर है कि ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर क्या कार्रवाई की जाती है। यदि जांच होती है तो उसके निष्कर्षों से ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
